{"_id":"5b48e37c4f1c1b4f748b466c","slug":"153150348113-grnoida-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यीडा में जमीन घोटाला--सीबीआई जांच में फंसेंगे कई बड़े नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यीडा में जमीन घोटाला--सीबीआई जांच में फंसेंगे कई बड़े नाम
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हेडिग: यीडा में जमीन घोटाला : सीबीआई जांच में फंसेंगे कई बड़े
छह बड़े घोटालों में करीब 2000 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण में जमीन घोटाले की सीबीआई जांच से सपा व बसपा शासनकाल के कई बड़े अफसर व नेता फंस सकते हैं। जमीन खरीद में कई सफेदपोश के नाम भी शामिल रहे हैं। 2 जून को पीसी गुप्ता पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही यीडा चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने सीबीआई जांच के लिए भी सिफारिश की थी। प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। जानकार बताते हैं कि जांच भले ही मथुरा में जमीन घोटाले से शुरू होगी, लेकिन इसकी आंच यीडा में अन्य जमीन खरीद घोटाले तक जाएगी। पीसी गुप्ता के समय के छह बड़े घोटाले पहले ही चर्चा में हैं, जिनसे करीब 2000 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है। इनमें से कुछ की जांच पूरी भी हो चुकी है।
ये है छह घोटाले
---------------
मथुरा में 126 करोड़ का घोटाला
2014 में मथुरा के सात गांवों मादौर, सेउपट्टी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुरा बांगर व नौहझील बांगर में 57.15 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई। इसके एवज में 85.49 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस रकम पर यीडा अब तक 40.93 करोड़ रुपये भी जमा कर चुका है। इस जमीन पर प्राधिकरण की कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं थी। अब भी यह जमीन खाली पड़ी है।
जहांगीरपुर में 80 करोड़ का जमीन घोटाला
जहांगीरपुर में 765 केवी सबस्टेशन की जमीन खरीदने में 80 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। बिजलीघर के नाम पर जरूरत से अधिक जमीन खरीदी गई। यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार पहले ही कह चुके हैं इनमें भी अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जिनके नाम मथुरा घोटाले में हैं। इसकी भी जांच लगभग पूरी हो गई है। दोषियों पर जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है।
विज्ञापन
जेवर में 450 करोड़ का घोटाला
2009 से 2013 के बीच यमुना प्राधिकरण के 15 गांवों में करीब 700 एकड़ जमीन खरीदी गई। इनमें बैराना, अलीपुर, भट्टा, अमरपुर पलाका, जहांगीरपुर, दयानतपुर, करौली बांगर, मेहंदीपुर बांगर, अनवरगढ़ बांगर, सुल्तानपुर, तकीपुर बांगर, मोहम्मदाबाद खेड़ा, भाईपुर ब्रह्मनान, नेवला गोपाल गढ़ और लतीफपुर बांगर शामिल हैं। इन गांवों की जमीन पर कोई प्लान नहीं बना था, फिर भी प्राधिकरण ने खरीद ली। किसानों को इसका मुआवजा बांट दिया गया। इन गांवों में 450 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने का आकलन है।
हाथरस में 150 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला
हाथरस के मुढ़ावली गांव के किसानों से करीब 42 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। जमीन देने वाले किसानों को विकसित एरिया में सात फीसदी भूखंड देना था। इसी की आड़ लेकर 2013 में हाथरस में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। यह जमीन भी मास्टर प्लान से बाहर की है। यहां भी जमीन खरीदने में अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जो कि मथुरा में जमीन घोटाले में हैं।
------------------
जीरो पीरियड का लाभ
यमुना प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता का नाम न सिर्फ जमीन खरीदने में हुई गड़बड़ी में शामिल है, बल्कि बिल्डरों को जीरो पीरियड का लाभ देकर भी प्राधिकरण को नुकसान पहुंचाने में भी सामने आ रहा है। शासन ने यमुना प्राधिकरण के साथ ही नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भी जांच कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से करने को कहा है। इससे यमुना प्राधिकरण को 500 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन है।
-----------
13 संस्थागत भूखंडों का सस्ती दर पर आवंटन
यमुना प्राधिकरण के सेक्टर 17ए व 24 में करीब सात साल पहले 13 संस्थागत भूखंडों का करीब 1055 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन का आवंटन हुआ, जबकि जमीन अधिग्रहण से लेकर विकास कार्य कराने और सात प्रतिशत आवासीय जमीन किसानों को देने तक का खर्च जोड़ा जाए तो इसकी कीमत करीब 2200 रुपये प्रति वर्ग मीटर बैठती है। आवंटन इससे भी अधिक कीमत पर होनी चाहिए थी, लेकिन आधी दर पर आवंटित कर दी गई। इन सातों आवंटन से प्राधिकरण को करीब 500 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है। इसकी जांच चल रही है।
विज्ञापन
छह बड़े घोटालों में करीब 2000 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण में जमीन घोटाले की सीबीआई जांच से सपा व बसपा शासनकाल के कई बड़े अफसर व नेता फंस सकते हैं। जमीन खरीद में कई सफेदपोश के नाम भी शामिल रहे हैं। 2 जून को पीसी गुप्ता पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही यीडा चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने सीबीआई जांच के लिए भी सिफारिश की थी। प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। जानकार बताते हैं कि जांच भले ही मथुरा में जमीन घोटाले से शुरू होगी, लेकिन इसकी आंच यीडा में अन्य जमीन खरीद घोटाले तक जाएगी। पीसी गुप्ता के समय के छह बड़े घोटाले पहले ही चर्चा में हैं, जिनसे करीब 2000 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है। इनमें से कुछ की जांच पूरी भी हो चुकी है।
ये है छह घोटाले
---------------
मथुरा में 126 करोड़ का घोटाला
2014 में मथुरा के सात गांवों मादौर, सेउपट्टी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुरा बांगर व नौहझील बांगर में 57.15 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई। इसके एवज में 85.49 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस रकम पर यीडा अब तक 40.93 करोड़ रुपये भी जमा कर चुका है। इस जमीन पर प्राधिकरण की कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं थी। अब भी यह जमीन खाली पड़ी है।
विज्ञापन
जहांगीरपुर में 80 करोड़ का जमीन घोटाला
जहांगीरपुर में 765 केवी सबस्टेशन की जमीन खरीदने में 80 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। बिजलीघर के नाम पर जरूरत से अधिक जमीन खरीदी गई। यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार पहले ही कह चुके हैं इनमें भी अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जिनके नाम मथुरा घोटाले में हैं। इसकी भी जांच लगभग पूरी हो गई है। दोषियों पर जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है।
विज्ञापन
जेवर में 450 करोड़ का घोटाला
2009 से 2013 के बीच यमुना प्राधिकरण के 15 गांवों में करीब 700 एकड़ जमीन खरीदी गई। इनमें बैराना, अलीपुर, भट्टा, अमरपुर पलाका, जहांगीरपुर, दयानतपुर, करौली बांगर, मेहंदीपुर बांगर, अनवरगढ़ बांगर, सुल्तानपुर, तकीपुर बांगर, मोहम्मदाबाद खेड़ा, भाईपुर ब्रह्मनान, नेवला गोपाल गढ़ और लतीफपुर बांगर शामिल हैं। इन गांवों की जमीन पर कोई प्लान नहीं बना था, फिर भी प्राधिकरण ने खरीद ली। किसानों को इसका मुआवजा बांट दिया गया। इन गांवों में 450 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने का आकलन है।
हाथरस में 150 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला
हाथरस के मुढ़ावली गांव के किसानों से करीब 42 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। जमीन देने वाले किसानों को विकसित एरिया में सात फीसदी भूखंड देना था। इसी की आड़ लेकर 2013 में हाथरस में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। यह जमीन भी मास्टर प्लान से बाहर की है। यहां भी जमीन खरीदने में अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जो कि मथुरा में जमीन घोटाले में हैं।
------------------
जीरो पीरियड का लाभ
यमुना प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता का नाम न सिर्फ जमीन खरीदने में हुई गड़बड़ी में शामिल है, बल्कि बिल्डरों को जीरो पीरियड का लाभ देकर भी प्राधिकरण को नुकसान पहुंचाने में भी सामने आ रहा है। शासन ने यमुना प्राधिकरण के साथ ही नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भी जांच कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से करने को कहा है। इससे यमुना प्राधिकरण को 500 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन है।
-----------
13 संस्थागत भूखंडों का सस्ती दर पर आवंटन
यमुना प्राधिकरण के सेक्टर 17ए व 24 में करीब सात साल पहले 13 संस्थागत भूखंडों का करीब 1055 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन का आवंटन हुआ, जबकि जमीन अधिग्रहण से लेकर विकास कार्य कराने और सात प्रतिशत आवासीय जमीन किसानों को देने तक का खर्च जोड़ा जाए तो इसकी कीमत करीब 2200 रुपये प्रति वर्ग मीटर बैठती है। आवंटन इससे भी अधिक कीमत पर होनी चाहिए थी, लेकिन आधी दर पर आवंटित कर दी गई। इन सातों आवंटन से प्राधिकरण को करीब 500 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है। इसकी जांच चल रही है।