{"_id":"5ba2bc2f867a557fe51016be","slug":"141537391663-noida-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयकर विभाग के रडार पर किराये से मोटी कमाई वाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयकर विभाग के रडार पर किराये से मोटी कमाई वाले
Updated Thu, 20 Sep 2018 02:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मकान और दुकानों से लाखों रुपये किराया वसूलने वाले अब आयकर विभाग के रडार पर हैं। ऐसे मकान मालिकों की कुंडली तैयार की जा रही है, जिनकी किराये के रूप में 2.50 लाख रुपये से ज्यादा आमदनी है। आरडब्ल्यूए और अपार्टमेंट ऑनर एसोसिएशन से जानकारियां जुटाई जा रही हैं। किरायेदारों के माध्यम से मकान मालिकों पर शिकंजा कसा जाएगा। विभागीय अधिकारियों की मानें तो अक्तूबर में 10 हजार से ज्यादा किरायदारों को नोटिस जारी करने की तैयारी है। नोटिस के माध्यम से किरायदारों के साथ मकान मालिकों का ब्योरा मांगा जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2017-18 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 41 हजार से ज्यादा बढ़ी है जिसके बाद गौतमबुद्ध नगर में आयकर दाताओं की संख्या बढ़कर दो लाख से ज्यादा हो गई है। आयकर अधिकारियों के मुताबिक ऐसे करदाताओं की संख्या इस बार बढ़ी है जिनकी किराये के रूप में अच्छी खासी आमदनी है या फिर जमीन अधिग्रहण की रकम पर लगने वाले ब्याज की राशि टैक्स सीमा के अंतर्गत आती है। जिले में महज दो लाख आयकरदाताओं की संख्या बेहद कम है, जबकि इस औद्योगिक शहर में मकान व दुकान को किराये पर उठाने का कारोबार जोरों पर है। इसलिए इस साल ऐसे भी लोगों पर विशेष निगरानी रहेगी। जून में आयकर विभाग ने पत्र लिखकर आरडब्ल्यूए और रेजिडेंशियल सोसायटियों से सहयोग मांगा था। हाल ही में विभाग के आला अधिकारियों ने भी टैक्स रिकवरी बढ़ाने के लिए नोएडा में विस्तृत योजना पर प्रकाश डाला था। अब इसके परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं। आयकर विभाग को सेक्टरों और सोसायटियों से जानकारी मिलने लगी है। इस महीने के अंत तक करीब 10 हजार किरायदारों की सूचना एकत्रित होने का अनुमान है। अक्तूूबर में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। किरायदारों से सूचना मिलने के बाद मकान मालिक की रिटर्न फाइल की जांच की जाएगी।
क्या आप जानते हैं
- यदि आपकी सकल वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से अधिक है तो आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
- यदि आपकी आय से टैक्स की कटौती (टीडीएस) हो चुकी है, तब भी आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
- व्यापार के मामले में आपको अपना आयकर रिटर्न वहीं दाखिल करना चाहिए, जिस शहर में व्यापार कर रहे हैं।
- ब्याज की आय भी 2.50 लाख रुपये से अधिक है और टीडीएस कटौती हो चुकी है तो भी रिटर्न भरना अनिवार्य।
- किसी भी प्रकार के किराये से होने वाली आय यदि कर योग्य है व सकल वार्षिक आय 2.50 लाख से अधिक है तो रिटर्न अनिवार्य।
- भूमि अधिग्रहण पर मिलने वाली मुआवजा राशि कर मुक्त है, लेकिन इसमें ब्याज की राशि शामिल है तो रिटर्न भरना अनिवार्य।
विज्ञापन
वित्तीय वर्ष 2017-18 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 41 हजार से ज्यादा बढ़ी है जिसके बाद गौतमबुद्ध नगर में आयकर दाताओं की संख्या बढ़कर दो लाख से ज्यादा हो गई है। आयकर अधिकारियों के मुताबिक ऐसे करदाताओं की संख्या इस बार बढ़ी है जिनकी किराये के रूप में अच्छी खासी आमदनी है या फिर जमीन अधिग्रहण की रकम पर लगने वाले ब्याज की राशि टैक्स सीमा के अंतर्गत आती है। जिले में महज दो लाख आयकरदाताओं की संख्या बेहद कम है, जबकि इस औद्योगिक शहर में मकान व दुकान को किराये पर उठाने का कारोबार जोरों पर है। इसलिए इस साल ऐसे भी लोगों पर विशेष निगरानी रहेगी। जून में आयकर विभाग ने पत्र लिखकर आरडब्ल्यूए और रेजिडेंशियल सोसायटियों से सहयोग मांगा था। हाल ही में विभाग के आला अधिकारियों ने भी टैक्स रिकवरी बढ़ाने के लिए नोएडा में विस्तृत योजना पर प्रकाश डाला था। अब इसके परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं। आयकर विभाग को सेक्टरों और सोसायटियों से जानकारी मिलने लगी है। इस महीने के अंत तक करीब 10 हजार किरायदारों की सूचना एकत्रित होने का अनुमान है। अक्तूूबर में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। किरायदारों से सूचना मिलने के बाद मकान मालिक की रिटर्न फाइल की जांच की जाएगी।
विज्ञापन
क्या आप जानते हैं
- यदि आपकी सकल वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से अधिक है तो आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
- यदि आपकी आय से टैक्स की कटौती (टीडीएस) हो चुकी है, तब भी आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
- व्यापार के मामले में आपको अपना आयकर रिटर्न वहीं दाखिल करना चाहिए, जिस शहर में व्यापार कर रहे हैं।
- ब्याज की आय भी 2.50 लाख रुपये से अधिक है और टीडीएस कटौती हो चुकी है तो भी रिटर्न भरना अनिवार्य।
- किसी भी प्रकार के किराये से होने वाली आय यदि कर योग्य है व सकल वार्षिक आय 2.50 लाख से अधिक है तो रिटर्न अनिवार्य।
- भूमि अधिग्रहण पर मिलने वाली मुआवजा राशि कर मुक्त है, लेकिन इसमें ब्याज की राशि शामिल है तो रिटर्न भरना अनिवार्य।