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भागा हसन सालों बाद परिजनों से मिला
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:40 PM IST
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दिल्ली से भागा हसन सालों बाद परिजनों से मिला
पवन कुमार सेठी
गुरुग्राम। परिवार से मिलने की आस खो चुके हसन (15) के चेहरे पर 9 साल बाद मुस्कान लौटी है। मंगलवार को बाल कल्याण कमेटी ने हसन को उसके परिवार से मिलवा दिया। हसन मदरसे में मच्छरों के काटने से परेशान होकर 2009 में दिल्ली से भाग आया था और अपना घर भूल गया था। जिसके बाद से वह शेल्टर होम में रह रहा था। जुलाई में शेल्टर होम से गए एक टूर के दौरान हसन ने सुल्तानपुर दिल्ली क्षेत्र को जाना पहचाना क्षेत्र बताया जिस पर कमेटी के कॉर्डिनेटर ने अच्छे की उम्मीद में उसके परिवार को ढूंढना शुरू कर दिया। मंगलवार को कमेटी ने हसन को परिवार को सौंप दिया। बाल कल्याण कमेटी की चेयरमैन शकुंतला ढुल ने बताया कि 2009 मेें हसन को सेक्टर-4 स्थित उज्जवल निकेतन में लाया गया था। यहां उसके परिजनों का पता न लगने पर शेल्टर होम संचालिका ने उसके अभिभावकों के नाम के स्थान पर अपना नाम लिखवा दिया था। उज्जल निकेतन में खामियां पाए जाने के बाद उसे 2017 में बंद कर दिया गया। यहां रहने वाले बच्चों को दूसरे शेल्टर होम उद्यान केयर में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसी में हसन को भी स्थानांतरित किया गया। यहां कॉर्डिनेटर आशिफ अली शेल्टर होम के बच्चों को 22 जुलाई को घुमाने के लिए सोनीपत के जुरासिक पार्क ले गए थे। जाते वक्त हसन ने दिल्ली के सुल्तानपुर को पहचाना था।
एक महीने तक की कड़ी मेहनत
आशिफ अली ने बताया कि जुलाई में हसन के बताने के बाद वह उसे लेकर सुल्तानपुर में उसका घर तलाशने लगे और मदरसों में पूछताछ की। इसी दौरान उन्हें छतरपुर क्षेत्र के मदरसे से हसन के परिजनों के बारे में पता लगा और हसन के नाना-नानी से मुलाकात हुई जहां से उसके माता-पिता का पता लगा।
राजस्थान में रह रहे परिजन
हसन के पिता मोहम्मद सलीम ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। 2009 में वह हसन से बिछड़ गए थे। हसन को पढ़ने के लिए मदरसे में भेजने के बाद वह छतरपुर से कन्हई नौकरी के लिए आ गए। कन्हई में आने के बाद उन्हें फोन आया कि हसन मदरसे से भाग गया। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा था। अब वह काम के लिए राजस्थान के अलवर के गांव जवाना में रह रहे हैं।
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मिलने के लिए शेल्टर होम के बाहर ही बैठे रहे परिजन
हसन के सकुशल मिलने से परिवार खुश है। उसे देखते ही परिजनों की आंखें छलक उठी। सोमवार को सूचना मिलते ही वह अपने आपको घर पर रोक ही नहीं पाए और नरसिंह पुर स्थित शेल्टर होम पहुंच गए। हालांकि देर शाम होने के चलते किसी को मिलने की अनुमति नहीं थी, लेकिन एक झलक पाकर परिजन शेल्टर होम के बाहर ही बैठे रहे।
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हसन को परिजनों से मिलवा दिया गया है। कॉर्डिनेटर ने इसमें अहम भूमिका निभाई। हसन के परिवार से मिलने के बाद कुछ अन्य बच्चे भी अपने परिवार के बारे में बताने के लिए आगे आ रहे हैं। यह कमेटी के लिए बड़ी उपलब्धि है कि 9 साल बाद बच्चे को उसका परिवार मिल गया।
- शकुंतला ढुल, चेयरमैन, बाल कल्याण कमेटी
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पवन कुमार सेठी
गुरुग्राम। परिवार से मिलने की आस खो चुके हसन (15) के चेहरे पर 9 साल बाद मुस्कान लौटी है। मंगलवार को बाल कल्याण कमेटी ने हसन को उसके परिवार से मिलवा दिया। हसन मदरसे में मच्छरों के काटने से परेशान होकर 2009 में दिल्ली से भाग आया था और अपना घर भूल गया था। जिसके बाद से वह शेल्टर होम में रह रहा था। जुलाई में शेल्टर होम से गए एक टूर के दौरान हसन ने सुल्तानपुर दिल्ली क्षेत्र को जाना पहचाना क्षेत्र बताया जिस पर कमेटी के कॉर्डिनेटर ने अच्छे की उम्मीद में उसके परिवार को ढूंढना शुरू कर दिया। मंगलवार को कमेटी ने हसन को परिवार को सौंप दिया। बाल कल्याण कमेटी की चेयरमैन शकुंतला ढुल ने बताया कि 2009 मेें हसन को सेक्टर-4 स्थित उज्जवल निकेतन में लाया गया था। यहां उसके परिजनों का पता न लगने पर शेल्टर होम संचालिका ने उसके अभिभावकों के नाम के स्थान पर अपना नाम लिखवा दिया था। उज्जल निकेतन में खामियां पाए जाने के बाद उसे 2017 में बंद कर दिया गया। यहां रहने वाले बच्चों को दूसरे शेल्टर होम उद्यान केयर में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसी में हसन को भी स्थानांतरित किया गया। यहां कॉर्डिनेटर आशिफ अली शेल्टर होम के बच्चों को 22 जुलाई को घुमाने के लिए सोनीपत के जुरासिक पार्क ले गए थे। जाते वक्त हसन ने दिल्ली के सुल्तानपुर को पहचाना था।
एक महीने तक की कड़ी मेहनत
आशिफ अली ने बताया कि जुलाई में हसन के बताने के बाद वह उसे लेकर सुल्तानपुर में उसका घर तलाशने लगे और मदरसों में पूछताछ की। इसी दौरान उन्हें छतरपुर क्षेत्र के मदरसे से हसन के परिजनों के बारे में पता लगा और हसन के नाना-नानी से मुलाकात हुई जहां से उसके माता-पिता का पता लगा।
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राजस्थान में रह रहे परिजन
हसन के पिता मोहम्मद सलीम ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। 2009 में वह हसन से बिछड़ गए थे। हसन को पढ़ने के लिए मदरसे में भेजने के बाद वह छतरपुर से कन्हई नौकरी के लिए आ गए। कन्हई में आने के बाद उन्हें फोन आया कि हसन मदरसे से भाग गया। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा था। अब वह काम के लिए राजस्थान के अलवर के गांव जवाना में रह रहे हैं।
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मिलने के लिए शेल्टर होम के बाहर ही बैठे रहे परिजन
हसन के सकुशल मिलने से परिवार खुश है। उसे देखते ही परिजनों की आंखें छलक उठी। सोमवार को सूचना मिलते ही वह अपने आपको घर पर रोक ही नहीं पाए और नरसिंह पुर स्थित शेल्टर होम पहुंच गए। हालांकि देर शाम होने के चलते किसी को मिलने की अनुमति नहीं थी, लेकिन एक झलक पाकर परिजन शेल्टर होम के बाहर ही बैठे रहे।
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हसन को परिजनों से मिलवा दिया गया है। कॉर्डिनेटर ने इसमें अहम भूमिका निभाई। हसन के परिवार से मिलने के बाद कुछ अन्य बच्चे भी अपने परिवार के बारे में बताने के लिए आगे आ रहे हैं। यह कमेटी के लिए बड़ी उपलब्धि है कि 9 साल बाद बच्चे को उसका परिवार मिल गया।
- शकुंतला ढुल, चेयरमैन, बाल कल्याण कमेटी