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Noida News: 13 मंत्रालय और विभाग करेंगे नवीन प्रौद्योगिकी पर कार्य

Tue, 14 Oct 2025 12:41 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:41 AM IST
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13 ministries and departments will work on new technology
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में नवीन कृषि प्रौद्योगिकी पर कार्यक्रम का सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के महानिदेशक एवं सचिव डेयर डाॅ. मांगी लाल जाट ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार 13 मंत्रालय और विभाग मिलकर कार्य करेंगे। आईसीएआर भी इनमें एक है। वैज्ञानिक उत्कृष्टता, निरंतरता और नवोन्मेष आधारित विकास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे दोहराव नहीं होगा, न संसाधन कम पड़ेंगे। शोध साझा होने से बेहतर परिणाम मिलेंगे। इसी लक्ष्य के साथ आईसीएआर के सभी संस्थान और केंद्र आगे बढ़ेंगे। उन्होंने क्लोन पशु, नए शोध पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट के एनडीआरआई पहुंचने पर निदेशक डॉ. धीर सिंह ने स्वागत किया।
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महानिदेशक डाॅ. मांगी लाल जाट ने कहा कि नई दिल्ली के भारत मंडपम में 3 से 5 नवंबर तक उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवोन्मेष कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन होगा, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे। उन्होंने कहा कि कान्लेव में 13 मंत्रालयों व विभागों के 11 थीमेटिक सत्रों का आयोजन होगा। स्वास्थ्य शिक्षा, कृषि, ऊर्जा, इलेक्ट्राॅनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और अन्य मंत्रालयों एवं विभागों की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, निरंतरता तथा नवोन्मेष आधारित विकास पर कार्य करेंगे। पर्यावरण में हो रहे बदलाव तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए विज्ञान आधारित नवीन प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।
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उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), डा. राघवेन्द्र भट्टा ने कहा कि पशु विज्ञान क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए परंपरागत तकनीकों के साथ-साथ नवीन तकनीकियों एवं प्रौद्योगिकियों को समेकित रूप से बनाने की आवश्यकता है। उप महानिदेशक (आईसीएआर) डॉ..एसएन.झा ने कहा कि एस्टिक-ईट ने कहा कि भारतीय कृषि के क्षेत्र में जो चुनौतियां हैं उनको संबोधित करने के लिए वैज्ञानिक प्रतिभा एवं नवोन्मेष का इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में एडीजी डा. अनिल राय ने भी विचार रखे। इस मौके पर आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. रतन तिवारी, सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ.आरके यादव, एनबीएजीआर के निदेशक डॉ. एनएच मोहन सहित कई स्थानों के वैज्ञानिक मौजूद रहे। संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डाॅ. एके सिंह ने आभार व्यक्त किया।
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