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अंगदान
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:07 AM IST
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ब्रेन डेड नरेश के अंगदान से तीन को नया जीवन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने परिवार को सम्मानित करने की घोषणा की थी, फोर्टिस ने दिया पदक
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। अपनों को खोकर किसी और को नया जीवन देना बहुत ही साहस का काम है। कुछ ऐसा ही करने पर सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में इशांत और उनकी मां अनीता जैन को पदक से सम्मानित किया गया। दरअसल, पिता नरेश चंद्र के अंगदान करने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने परिवार को सम्मानित करने की घोषणा की थी। लेकिन परिवार समारोह में नहीं पहुंच सका था। लिहाजा यह पुरस्कार अस्पताल को दिया गया था। वहीं, बुधवार को प्रबंधन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परिवार को पदक दिया। दरअसल, अनीता जैन के पति नरेश चंद्र जैन (58) को दो मार्च को ब्रेन हैमरेज हुआ था। उन्हें फोर्टिस नोएडा लाया गया। जहां 14 मार्च को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अस्पताल के जोनल डायरेक्टर हरदीप सिंह ने बताया कि ब्रेन डेड इंसान के बचने की संभावना नहीं रहती है। वह किसी भी वक्त जीवन गंवा सकता है। लेकिन ऐेसे व्यक्ति का अंगदान किया जाए तो उससे करीब आठ जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लेकिन फैसला सिर्फ मरीज के परिजन ले सकते हैं। परिवार की सहमति के बाद अंगों के जरिये तीन लोगों की जान बचाई गई।
अंगदान से बच सकती है जिंदगी
इशांत ने बताया कि एक बार किडनी फेल होने से पड़ोसी की मौत हो गई थी। उनके पिता कहते थे कि लोगों को अंगदान करना चाहिए। ऐसा करने से किसी की जिंदगी बच सकती है। अस्पताल ने परिवार से जब अंगदान के लिए पूछा तो उन्होंने स्वीकृति दे दी। अनीता जैन ने कहा कि उन्हें पति खोने का गम है लेकिन इस बात की खुशी है कि उनके पति के जरिये तीन लोगों को नया जीवन मिला है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने परिवार को सम्मानित करने की घोषणा की थी, फोर्टिस ने दिया पदक
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। अपनों को खोकर किसी और को नया जीवन देना बहुत ही साहस का काम है। कुछ ऐसा ही करने पर सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में इशांत और उनकी मां अनीता जैन को पदक से सम्मानित किया गया। दरअसल, पिता नरेश चंद्र के अंगदान करने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने परिवार को सम्मानित करने की घोषणा की थी। लेकिन परिवार समारोह में नहीं पहुंच सका था। लिहाजा यह पुरस्कार अस्पताल को दिया गया था। वहीं, बुधवार को प्रबंधन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परिवार को पदक दिया। दरअसल, अनीता जैन के पति नरेश चंद्र जैन (58) को दो मार्च को ब्रेन हैमरेज हुआ था। उन्हें फोर्टिस नोएडा लाया गया। जहां 14 मार्च को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अस्पताल के जोनल डायरेक्टर हरदीप सिंह ने बताया कि ब्रेन डेड इंसान के बचने की संभावना नहीं रहती है। वह किसी भी वक्त जीवन गंवा सकता है। लेकिन ऐेसे व्यक्ति का अंगदान किया जाए तो उससे करीब आठ जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लेकिन फैसला सिर्फ मरीज के परिजन ले सकते हैं। परिवार की सहमति के बाद अंगों के जरिये तीन लोगों की जान बचाई गई।
अंगदान से बच सकती है जिंदगी
इशांत ने बताया कि एक बार किडनी फेल होने से पड़ोसी की मौत हो गई थी। उनके पिता कहते थे कि लोगों को अंगदान करना चाहिए। ऐसा करने से किसी की जिंदगी बच सकती है। अस्पताल ने परिवार से जब अंगदान के लिए पूछा तो उन्होंने स्वीकृति दे दी। अनीता जैन ने कहा कि उन्हें पति खोने का गम है लेकिन इस बात की खुशी है कि उनके पति के जरिये तीन लोगों को नया जीवन मिला है।
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