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बकरीद का त्योंहार मेवात में धूमधाम से मनाया गया
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:40 PM IST
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धूमधाम से मनाया गया बकरीद का त्यौहार
-मस्जिदों और इमामबारगाहों में अमन-चैन की दुआ के लिए झुके हजारों हाथ
अमर उजाला ब्यूरो
नूंह/पुन्हाना/फिरोजपुर झिरका। ईद-उल-जुहा यानी बकरीद का त्यौहार बुधवार को मेवात जिला के नूंह, पुन्हाना, फिरेाजपुर झिरका सहित आदि शहरों में धूमधाम से मनाया गया। मस्जिदों और इमामबारगाहों में अमन-चैन की अल्लाह के सजदे में हजारों सिर झुके। सभी ने मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगी।
जिले के पुन्हाना, नूंह, घासेडा, मालब, भादस, फिरोजपुर झिरका, पिनगवां, शाहचौखा, सिंगार आदि सैकड़ों बडे़ गांवों की ईदगाह में ईद की नमाज अदा की गई। इस मौके पर बच्चे, बूढ़े और नौजवानों ने नए कपडे़ पहने और गांव की ईदगाह में दो रकात नमाज अदा की। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने पशुओं की कुर्बानी की और उसके गोश्त को दोस्तों, गरीबों और रिश्तेदारों में बांटा। गांव की ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद उलेमाओं ने मेवात, केरल और देश में अमन और शांति के लिए दुआ मांगी गई। वहीं केरल में बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए साहयोग करने का आह्वान किया गया।
मौलाना जमील अहमद ने बताया कि ईद उल अजहा यानी बकरीद का त्यौहार खुशी और बलिदान का त्यौहार है। कुर्बानी केवल पशुओं की करने से नहीं होती बल्कि आदमी को वो सब कुर्बान कर देना चाहिए, जिससे समाज में बुराइया फैलती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग मालदार हैं, उन सब पर कुर्बानी करना फर्ज है।
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वहीं पूर्व मंत्री आफताब अहमद ने लोगों को बकरीद के मौके पर मुबारकबाद देते हुए कहा कि बकरीद का त्यौहार इंसान को त्याग बलिदान करना सिखाता है। यह त्यौहार हर बुरे काम छोड़ने की कुर्बानी देने का आह्वान करता है। तीन दिन तक होने वाली कुर्बानी का गोश्त मुफ्त में गरीब यतीमों को बांटना चाहिए। वहीं उन्होंने केरल में आई बाढ़ त्रासदी के लिए लोगों से राहत मिलने के लिए दुआएं कराईं। वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सभी खंडों में पुलिस बल तैनात किया गया था।
फोटो- नूंह की ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद मेवात, केरल और देश में अमन-चैन की दुआ मांगते हुए
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-मस्जिदों और इमामबारगाहों में अमन-चैन की दुआ के लिए झुके हजारों हाथ
अमर उजाला ब्यूरो
नूंह/पुन्हाना/फिरोजपुर झिरका। ईद-उल-जुहा यानी बकरीद का त्यौहार बुधवार को मेवात जिला के नूंह, पुन्हाना, फिरेाजपुर झिरका सहित आदि शहरों में धूमधाम से मनाया गया। मस्जिदों और इमामबारगाहों में अमन-चैन की अल्लाह के सजदे में हजारों सिर झुके। सभी ने मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगी।
जिले के पुन्हाना, नूंह, घासेडा, मालब, भादस, फिरोजपुर झिरका, पिनगवां, शाहचौखा, सिंगार आदि सैकड़ों बडे़ गांवों की ईदगाह में ईद की नमाज अदा की गई। इस मौके पर बच्चे, बूढ़े और नौजवानों ने नए कपडे़ पहने और गांव की ईदगाह में दो रकात नमाज अदा की। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने पशुओं की कुर्बानी की और उसके गोश्त को दोस्तों, गरीबों और रिश्तेदारों में बांटा। गांव की ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद उलेमाओं ने मेवात, केरल और देश में अमन और शांति के लिए दुआ मांगी गई। वहीं केरल में बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए साहयोग करने का आह्वान किया गया।
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मौलाना जमील अहमद ने बताया कि ईद उल अजहा यानी बकरीद का त्यौहार खुशी और बलिदान का त्यौहार है। कुर्बानी केवल पशुओं की करने से नहीं होती बल्कि आदमी को वो सब कुर्बान कर देना चाहिए, जिससे समाज में बुराइया फैलती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग मालदार हैं, उन सब पर कुर्बानी करना फर्ज है।
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वहीं पूर्व मंत्री आफताब अहमद ने लोगों को बकरीद के मौके पर मुबारकबाद देते हुए कहा कि बकरीद का त्यौहार इंसान को त्याग बलिदान करना सिखाता है। यह त्यौहार हर बुरे काम छोड़ने की कुर्बानी देने का आह्वान करता है। तीन दिन तक होने वाली कुर्बानी का गोश्त मुफ्त में गरीब यतीमों को बांटना चाहिए। वहीं उन्होंने केरल में आई बाढ़ त्रासदी के लिए लोगों से राहत मिलने के लिए दुआएं कराईं। वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सभी खंडों में पुलिस बल तैनात किया गया था।
फोटो- नूंह की ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद मेवात, केरल और देश में अमन-चैन की दुआ मांगते हुए