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102.5 करोड़ का बीमा करेगा फ्लैट खरीदारों के नुकसान की भरपाई
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नोएडा। सेक्टर-93ए सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट ट्विन टावर के अंतिम ब्लास्ट से अगर किसी तरह का नुकसान होता है तो 102.5 करोड़ का बीमा फ्लैट खरीदारों की भरपाई करेगा। इस बाबत एडिफिस इंजीनियरिंग ने ड्राफ्ट तैयार कर नोएडा प्राधिकरण को सौंप दिया है। प्राधिकरण सात दिन में बताएगा कि ड्राफ्ट में किसी तरह का परिवर्तन करना होगा या नहीं। बीमे के लिए टाटा एआईजी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का चयन किया गया है।
ट्विन टावर को गिराने के दौरान अगर किसी तरह का नुकसान अन्य फ्लैटों या टावरों को होता है तो इसकी भरपाई के लिए बीमा कराने का विकल्प सामने रखा गया है। शुरू में इसके लिए एक खास दायरा बनाया गया था। सूत्रों का कहना है कि यह ट्विन टावर के आसपास किसी भी टावर या फ्लैट के लिए लागू होगा। हालांकि इसके लिए कंपनी के मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब अंतिम ब्लास्ट होगा तो आईआईटी चेन्नई की टीम कंपन मापेगी। यही मापन बीमा मिलने का आधार बनेगा। यानी कंपन मापने के बाद टीम यह तय करेगी कि किसी अन्य फ्लैट में हुआ नुकसान ट्विन टावर के ब्लास्ट की वजह से हुआ है या फिर किसी अन्य वजह से नुकसान हुआ है। इस आधार पर बीमे की राशि मिलेगी।
50 मीटर रेडियस के टावरों के फ्लैटों की हुई विडियोग्राफी
ट्विन टावर के 50 मीटर रेडियस के भीतर जितने भी टावर और फ्लैट हैं उनके अंदर और बाहर की विडियोग्राफी हुई है। इस विडियोग्राफी को कराने का मकसद यह है कि अंतिम ब्लास्ट के बाद अगर किसी तरह का नुकसान होता है तो पहले के वीडियोग्राफी के आधार पर पुष्टि की जाएगी कि वाकई नुकसान हुआ है या नहीं। इस आधार पर संबंधित फ्लैट मालिक को नुकसान की भरपाई की जाएगी।
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सात टावर ढके जाएंगे
ट्विन टावर के आसपास के सात टावरों को पूरी तरह से ढका जाएगा ताकि अंतिम ब्लास्ट के बाद उड़ने वाले धूल और मलबे से बचाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि एटीएस के चार और एमराल्ड कोर्ट के तीन टावरों को पूरी तरह से ढका जाएगा। इसका मकसद धूल आदि से टावरों व फ्लैटों को बचाना होगा।
15 दिन में लगा दिए जाएंगे पूरे कंटेनर
ट्विन टावर का मलबा जिस ओर गिरेगा। उस ओर 30 फीट ऊंचा लोहे की शीट लगाई जाएगी। इसका मकसद यह होगा कि मलबा गिरते समय चारो ओर फैले नहीं। इस बाबत लोहे की शीट लगाने का काम शुरू हो चुका है। इसे अगले 15 दिन में लगा दिया जाएगा।
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ट्विन टावर को गिराने के दौरान अगर किसी तरह का नुकसान अन्य फ्लैटों या टावरों को होता है तो इसकी भरपाई के लिए बीमा कराने का विकल्प सामने रखा गया है। शुरू में इसके लिए एक खास दायरा बनाया गया था। सूत्रों का कहना है कि यह ट्विन टावर के आसपास किसी भी टावर या फ्लैट के लिए लागू होगा। हालांकि इसके लिए कंपनी के मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब अंतिम ब्लास्ट होगा तो आईआईटी चेन्नई की टीम कंपन मापेगी। यही मापन बीमा मिलने का आधार बनेगा। यानी कंपन मापने के बाद टीम यह तय करेगी कि किसी अन्य फ्लैट में हुआ नुकसान ट्विन टावर के ब्लास्ट की वजह से हुआ है या फिर किसी अन्य वजह से नुकसान हुआ है। इस आधार पर बीमे की राशि मिलेगी।
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50 मीटर रेडियस के टावरों के फ्लैटों की हुई विडियोग्राफी
ट्विन टावर के 50 मीटर रेडियस के भीतर जितने भी टावर और फ्लैट हैं उनके अंदर और बाहर की विडियोग्राफी हुई है। इस विडियोग्राफी को कराने का मकसद यह है कि अंतिम ब्लास्ट के बाद अगर किसी तरह का नुकसान होता है तो पहले के वीडियोग्राफी के आधार पर पुष्टि की जाएगी कि वाकई नुकसान हुआ है या नहीं। इस आधार पर संबंधित फ्लैट मालिक को नुकसान की भरपाई की जाएगी।
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सात टावर ढके जाएंगे
ट्विन टावर के आसपास के सात टावरों को पूरी तरह से ढका जाएगा ताकि अंतिम ब्लास्ट के बाद उड़ने वाले धूल और मलबे से बचाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि एटीएस के चार और एमराल्ड कोर्ट के तीन टावरों को पूरी तरह से ढका जाएगा। इसका मकसद धूल आदि से टावरों व फ्लैटों को बचाना होगा।
15 दिन में लगा दिए जाएंगे पूरे कंटेनर
ट्विन टावर का मलबा जिस ओर गिरेगा। उस ओर 30 फीट ऊंचा लोहे की शीट लगाई जाएगी। इसका मकसद यह होगा कि मलबा गिरते समय चारो ओर फैले नहीं। इस बाबत लोहे की शीट लगाने का काम शुरू हो चुका है। इसे अगले 15 दिन में लगा दिया जाएगा।