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क्रेडिट कार्ड क्लोन कर विदेश में की 1.43 लाख की शॉपिंग
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नोएडा। साइबर अपराधियों ने साफ्टवेयर इंजीनियर के खाते से विदेश में करीब 1.43 लाख रुपये की शॉपिंग कर ली। सुबह मोबाइल में एसएमएस आने पर पीड़ित को वारदात का पता चला। वहीं, ओएलएक्स पर सोफा बेचने के लिए एक युवक ने पोस्ट डाली। ठगों ने उसे झांसे में लेकर खाते से 76 हजार रुपये निकाल लिए। पीड़ितों ने संबंधित थाना पुलिस से शिकायत की है।
केस-1
सेक्टर-77 स्थित प्रतीक विस्टीरिया सोसायटी निवासी अमित गुप्ता एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह सोसायटी के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास आरबीएल बैंक का क्रेडिट कार्ड है। साइबर ठगों ने शनिवार तड़के 4 बजे 20 बार उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर विदेश में करीब 1.43 लाख रुपये की शॉपिंग कर ली। आरोपियों ने जूते, कपड़े सहित आयुर्वेदिक उत्पाद भी खरीदे। मोबाइल पर एसएमएस देखे तो ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने अपना कार्ड ब्लॉक करवाया। पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने विदेशी मुद्रा पाउंड और डॉलर में शॉपिंग की। पीड़ित ने ठगी के बारे में संबंधित बैंक और सेक्टर-49 पुलिस को शिकायत दी है।
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केस-2
सेक्टर-39 निवासी अजय सरीन रियल एस्टे कंपनी में नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि 27 हजार रुपये में सोफा बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला था। अगले ही दिन एक शख्स का कॉल आया। उसने बताया कि वह सोफा खरीदना चाहता है, लेकिन सोफा ले जाने में उसे एक सप्ताह लगेगा। उन्होंने कहा कि अगर तब तक सोफा नहीं बिका तो तुम ले जाना। अजय ने बताया कि ठग 7 हजार रुपये खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात कही। इस पर वह झांसे में आ गए। बताया कि ठग ने उनके मोबाइल पर एक क्यूआर कोड भेजकर कहा कि वह जैसे ही उसे स्कैन करेंगे, उनके खाते में रुपये पहुंच जाएंगे। अजय के क्यूआर कोड स्कैन करते ही खाते से एक ही बार में 76 हजार रुपये निकल गए। पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की है।
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रोजाना औसतन 10 खातों में लग रही सेंध
साइबर सेल के आंकड़ें बताते हैं कि ठगों का गिरोह रोजाना औसतन 10 बैंक खातों में सेंध लगाकर लोगों की मेहनत की कमाई उड़ा रहा है। ऑनलाइन लेन-देन बढ़ऩे से साइबर ठगी की शिकायतें बढ़ रही हैं। वर्ष 2016 में साइबर अपराध से जुड़ीं करीब 1200 शिकायतें आई थीं। वर्ष 2017 में करीब 2200 शिकायतें साइबर सेल को मिली थीं। जबकि वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 2500 के आसपास रहा। वहीं, इस साल अब तक साढ़े तीन हजार मामले दर्ज हो चुके हैं। साइबर सेल एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल के मुताबिक, देश में सैकड़ों की संख्या में साइबर ठगी के गिरोह सक्रिय हैं। दिल्ली और नोएडा में ठगों ने बड़े-बड़े कॉल सेंटर खोल रखे हैं तो झारखंड का जामताड़ा गांव तो ठगों का अड्डा बन हुआ है। विदेशों से भी कई गिरोह भारतीय लोगों को निशाना बना रहे हैं।
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इन तरीकों से लगा रहे खातों में सेंध
- एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर।
- बैंक अकाउंट, एटीएम अथवा क्रेडिट कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने के बहाने।
- केवाईसी अपडेट कराने का झांसा देकर।
- डेबिट या क्रेडिट कार्ड के नवीनीकरण की बात कहकर।
- फेसबुक पर दोस्ती कर विदेश से गिफ्ट भेजने के नाम पर।
- बीमा पॉलिसी रिन्यू करने या रिफंड देने का झांसा देकर।
- लकी ड्रॉ में कार या नकद रुपये जीतने का लालच देकर।
- ऑनलाइन सस्ते मोबाइल फोन या अन्य उत्पाद बेचने के नाम पर।
- ओएलएक्स व क्वीकर के माध्यम से झांसे में लेकर।
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केस-1
सेक्टर-77 स्थित प्रतीक विस्टीरिया सोसायटी निवासी अमित गुप्ता एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह सोसायटी के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास आरबीएल बैंक का क्रेडिट कार्ड है। साइबर ठगों ने शनिवार तड़के 4 बजे 20 बार उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर विदेश में करीब 1.43 लाख रुपये की शॉपिंग कर ली। आरोपियों ने जूते, कपड़े सहित आयुर्वेदिक उत्पाद भी खरीदे। मोबाइल पर एसएमएस देखे तो ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने अपना कार्ड ब्लॉक करवाया। पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने विदेशी मुद्रा पाउंड और डॉलर में शॉपिंग की। पीड़ित ने ठगी के बारे में संबंधित बैंक और सेक्टर-49 पुलिस को शिकायत दी है।
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केस-2
सेक्टर-39 निवासी अजय सरीन रियल एस्टे कंपनी में नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि 27 हजार रुपये में सोफा बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला था। अगले ही दिन एक शख्स का कॉल आया। उसने बताया कि वह सोफा खरीदना चाहता है, लेकिन सोफा ले जाने में उसे एक सप्ताह लगेगा। उन्होंने कहा कि अगर तब तक सोफा नहीं बिका तो तुम ले जाना। अजय ने बताया कि ठग 7 हजार रुपये खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात कही। इस पर वह झांसे में आ गए। बताया कि ठग ने उनके मोबाइल पर एक क्यूआर कोड भेजकर कहा कि वह जैसे ही उसे स्कैन करेंगे, उनके खाते में रुपये पहुंच जाएंगे। अजय के क्यूआर कोड स्कैन करते ही खाते से एक ही बार में 76 हजार रुपये निकल गए। पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की है।
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रोजाना औसतन 10 खातों में लग रही सेंध
साइबर सेल के आंकड़ें बताते हैं कि ठगों का गिरोह रोजाना औसतन 10 बैंक खातों में सेंध लगाकर लोगों की मेहनत की कमाई उड़ा रहा है। ऑनलाइन लेन-देन बढ़ऩे से साइबर ठगी की शिकायतें बढ़ रही हैं। वर्ष 2016 में साइबर अपराध से जुड़ीं करीब 1200 शिकायतें आई थीं। वर्ष 2017 में करीब 2200 शिकायतें साइबर सेल को मिली थीं। जबकि वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 2500 के आसपास रहा। वहीं, इस साल अब तक साढ़े तीन हजार मामले दर्ज हो चुके हैं। साइबर सेल एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल के मुताबिक, देश में सैकड़ों की संख्या में साइबर ठगी के गिरोह सक्रिय हैं। दिल्ली और नोएडा में ठगों ने बड़े-बड़े कॉल सेंटर खोल रखे हैं तो झारखंड का जामताड़ा गांव तो ठगों का अड्डा बन हुआ है। विदेशों से भी कई गिरोह भारतीय लोगों को निशाना बना रहे हैं।
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इन तरीकों से लगा रहे खातों में सेंध
- एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर।
- बैंक अकाउंट, एटीएम अथवा क्रेडिट कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने के बहाने।
- केवाईसी अपडेट कराने का झांसा देकर।
- डेबिट या क्रेडिट कार्ड के नवीनीकरण की बात कहकर।
- फेसबुक पर दोस्ती कर विदेश से गिफ्ट भेजने के नाम पर।
- बीमा पॉलिसी रिन्यू करने या रिफंड देने का झांसा देकर।
- लकी ड्रॉ में कार या नकद रुपये जीतने का लालच देकर।
- ऑनलाइन सस्ते मोबाइल फोन या अन्य उत्पाद बेचने के नाम पर।
- ओएलएक्स व क्वीकर के माध्यम से झांसे में लेकर।