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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Noida Nithari Case A new turn came in life of Surendra Koli in year 2000

सुरेंद्र कोली की स्टोरी शुरू से: सन 2000 में जीवन में आया मोड़, दिल्ली ले आया ये काम; ऐसे बना निठारी का हैवान

Mon, 16 Oct 2023 09:00 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 16 Oct 2023 09:00 PM IST
सार

सुरेंद्र कोली दिल्ली या इसके आसपास ही रहकर काम करना चाहता था। इसलिए वह पंढेर के नोएडा सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में काम करने को तैयार हो गया। पंढेर के कहने पर ही कोली अपनी पत्नी को भी नोएडा ले आया था। इस दौरान पंढेर की पत्नी भी नोएडा में रह रही थी।

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Noida Nithari Case A new turn came in life of Surendra Koli in year 2000
Nithari Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा के निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली स्वादिष्ट खाना बनाने का एक्सपर्ट रहा है लेकिन गरीबी की वजह से वह अपने गांव में खुद खाने के लिए मोहताज रहता था। उसका परिवार बेहद गरीबी में अल्मोड़ा के पास के एक गांव में गुजारा करता था। अब से 23 साल पहले वह गांव की बकरियों की देखरेख करता था।

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साल 2000 से उसकी जिंदगी में नया मोड़ आया जब उसकी मुलाकात दिल्ली में रहने वाले एक ब्रिगेडियर से हुई। कोली के स्वादिष्ट खाना बनाने के बारे में जब ब्रिगेडियर को पता चला तब उन्होंने उसे नौकरी पर रख लिया। इसके बाद से वह ब्रिगेडियर के साथ गांव से दिल्ली चला आया। यहां वह उनके घर पर ही रहकर खाना बनाता था और साफ-सफाई करता था। तब तक वह सामान्य जिंदगी गुजार रहा था। उस समय तक उसका कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं था। न ही वह बच्चों के साथ किसी तरह की अभद्रता के आरोप में फंसा था। 

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इस केस का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाने वाले नोएडा के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ब्रिगेडियर के घर पर वह काफी मेहनत से काम करता था। लेकिन वर्ष 2003 में ब्रिगेडियर को दिल्ली से बाहर जाना पड़ गया। इसके बाद कोली मोनिंदर सिंह पंढेर के संपर्क में आया। वह दिल्ली या इसके आसपास ही रहकर काम करना चाहता था। इसलिए वह पंढेर के नोएडा सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में काम करने को तैयार हो गया। पंढेर के कहने पर ही कोली अपनी पत्नी को भी नोएडा ले आया था। इस दौरान पंढेर की पत्नी भी नोएडा में रह रही थी।

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पत्नी के जाने के बाद हैवान बना कोली
वर्ष 2004 में पंढेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया। इसके बाद कोली ने भी अपनी पत्नी को गांव भेज दिया। इस तरह कोठी में पंढेर और कोली ही अब रहने लगे थे। कई महीनों तक अकेले रहने के दौरान ही सामान्य रहने वाले कोली की जिंदगी में हैवानियत की शुरुआत हुई थी। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं। उनके लिए कोली ही खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था। इसलिए वह धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया था। 

जब रातोंरात टल गई थी फांसी
9 सितंबर 2014, सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिए मिला। इस बात की जानकारी खुद तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने दी थी।

मामले को ऐसे समझिए-

- 29 दिसंबर 2006 - सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पास बच्चों के नरकंकाल मिले। 

- 14 जनवरी 2006 - निठारी कांड की जांच सीबीआई ने शुरू की। 

- 13 फरवरी 2009 - सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर को सजा-ए-मौत। हाईकोर्ट से पंढेर बरी।

- 12 मई 2010 - सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत

- 28 अक्तूबर 2010 - सुरेंद्र कोली  को सजा-ए-मौत

- 22 दिसंबर 2010 - सुरेंद्र कोली  को सजा-ए-मौत

- 24 दिसंबर 12 - सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत

- 7 अक्तूबर 2016 - सुरेंद्र कोली को  सजा-ए-मौत

- 16 दिसंबर 2016 -सुरेंद्र कोली  को सजा-ए-मौत

- 24 जुलाई 2017 सुरेद्र कोली को सजा-ए-मौत, पंढेर बरी

-  8 दिसंबर 2017- सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर - दोनों को सजा-ए-मौत

-  2 मार्च 2019 -सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर - कोली को सजा-ए-मौत- पंढेर बरी

-  6 अप्रैल 2019 -सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर - कोली को सजा-ए-मौत। पंढेर बरी

-  16 जनवरी 2021- सुरेंद्र कोली - फांसी 

-  26 मार्च 2021 -सुरेंद कोली बरी

-  सात जनवरी 2022 सुरेंद्र कोली बरी

-  22 जनवरी 2022 सुरेंद्र कोली बरी

- 16 अक्तूबर 2023 मोनिंदर पंढेर व सुरेंद्र कोली बरी। 

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