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अब नोएडा गाजियाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज कर सकेंगे कोरोना के मरीजों का इलाज
Sat, 11 Jul 2020 05:20 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 11 Jul 2020 05:20 PM IST
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
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उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों को टेंपररी परमिशन दिया है कि वो कोरोना मरीजों के उपचार के लिए वार्ड चला सकते हैं। इसके साथ ही सरकार ने अलग-अलग कॉलेजों के लिए खर्च भी फिक्स कर दिए हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव(मेडिकल एजुकेशन) रजनीश दुबे ने आदेश दिया है कि प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेज के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए और भविष्य में मरीजों के लिए बेड की अतिरिक्त जरूरत को देखते हुए निजी मेडिकल कॉलेजों को कोरोना के मरीजों का इलाज करने की अनुमति दी जाती है और वो भी तय रेट पर।
निजी अस्पतालों को कोविड के इलाज के लिए दो श्रेणियों में बांटा गया है- नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर(एनएबीएच) और नॉन एनएबीएच एक्रेडिटेड। वहीं मरीजों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- बहुत मामूली लक्षण वाले, गंभीर लक्षण वाले और बहुत ही गंभीर लक्षण वाले।
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एनएबीएच अस्पतालों के रेट 8500 रुपये से 15300 रुपये प्रतिदिन तक हैं, जिसमें पीपीई किट का खर्च जुड़ा है। वहीं नॉन एनएबीएच श्रेणी के अस्पतालों का एक दिन का खर्च 6800 से 12750 रुपये तक है, इसमें भी पीपीई किट का खर्च जुड़ा है।
इस आदेश में ये भी कहा गया है कि पैकेज रेट में बेड, खाना, डॉक्टर की सलाह से लेकर ऑक्सीजन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि जैसे सभी तरह के खर्च जुड़े होंगे। हालांकि गर्भवती महिला के मामले में डिलीवरी का रेट और नवजात बच्चे की देखरेख का खर्च अलग से देना होगा जो प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत लिया जा सकेगा।
शारदा मेडिकल कॉलेज ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि अब मरीज हमारे यहां अपनी सुविधानुसार वार्ड का चयन कर सकेंगे।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव(मेडिकल एजुकेशन) रजनीश दुबे ने आदेश दिया है कि प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेज के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए और भविष्य में मरीजों के लिए बेड की अतिरिक्त जरूरत को देखते हुए निजी मेडिकल कॉलेजों को कोरोना के मरीजों का इलाज करने की अनुमति दी जाती है और वो भी तय रेट पर।
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निजी अस्पतालों को कोविड के इलाज के लिए दो श्रेणियों में बांटा गया है- नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर(एनएबीएच) और नॉन एनएबीएच एक्रेडिटेड। वहीं मरीजों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- बहुत मामूली लक्षण वाले, गंभीर लक्षण वाले और बहुत ही गंभीर लक्षण वाले।
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एनएबीएच अस्पतालों के रेट 8500 रुपये से 15300 रुपये प्रतिदिन तक हैं, जिसमें पीपीई किट का खर्च जुड़ा है। वहीं नॉन एनएबीएच श्रेणी के अस्पतालों का एक दिन का खर्च 6800 से 12750 रुपये तक है, इसमें भी पीपीई किट का खर्च जुड़ा है।
इस आदेश में ये भी कहा गया है कि पैकेज रेट में बेड, खाना, डॉक्टर की सलाह से लेकर ऑक्सीजन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि जैसे सभी तरह के खर्च जुड़े होंगे। हालांकि गर्भवती महिला के मामले में डिलीवरी का रेट और नवजात बच्चे की देखरेख का खर्च अलग से देना होगा जो प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत लिया जा सकेगा।
शारदा मेडिकल कॉलेज ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि अब मरीज हमारे यहां अपनी सुविधानुसार वार्ड का चयन कर सकेंगे।