नोएडा: लॉकडाउन में टीबी मरीजों को ढूंढने में हांफ गया क्षयरोग विभाग, अब तक मिले महज 3271 रोगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉकडाउन के दौरान व्यवस्थाएं सुस्त हुईं तो गौतमबुद्ध नगर जिला क्षयरोग विभाग भी टीबी रोगियों को ढूंढने में हांफ गया। वर्ष 2019 में जहां 10 हजार से अधिक रोगियों को तलाशा गया था, वहीं इस साल जुलाई के अंत तक करीब 3000 मरीज ही मिल पाए हैं।
ऐसे में पिछले आंकड़ों तक पहुंच पाने में विभाग नाकाम रहा है। विभाग के आंकड़ों में प्रत्येक वर्ष टीबी रोगियों में इजाफा होता रहा है। इस बार लॉकडाउन कहें या विभागीय सुस्ती, आंकड़ों में कमी रही है।
विभागीय अफसरों ने बताया कि 2019 में सरकारी अस्पताल या विभागीय स्तर से 6650 मरीजों को दवाएं दी गई थीं। वहीं, निजी अस्पतालों में संख्या 3463 थी। कुल 10113 मरीज थे, लेकिन इस साल जुलाई अंत तक 2273 मरीजों को विभाग तलाश पाया है।
वहीं, निजी अस्पतालों में 998 मरीज मिले हैं। इस साल कुल मरीजों की संख्या 3271 है। विशेष बात यह है कि इस साल के सापेक्ष 2018 में भी मरीजों की संख्या खासी अधिक रही थी।
दूसरे जिलों के मरीजों को दवा खिलाने का दावा
जिला क्षयरोग अधिकारी शिरीष जैन ने बताया कि लॉकडाउन में जहां अन्य जनपदों में टीबी कार्यक्रम पर असर पड़ा। वहीं, गौतमबुद्ध नगर में एक भी दिन अभियान नहीं रुका।
उनका दावा है कि आसपास के जिलों से मरीज यहां दवा लेने के लिए आए। किसी भी मरीज को दवा से वंचित नहीं रखा गया।
244 एमडीआर, 27 एक्सडीआर रोगी
टीबी की दवा का कोर्स 9 माह का है। बीच में दवाएं छोड़ने पर पुरानी दवाएं असर नहीं करती हैं। ऐसे मरीजों को मल्टी ड्रग रेसिसटेंट (एमडीआर) और अगली स्टेज एक्सटेंसिव ड्रग रेसिसटेंट (एक्सडीआर) की श्रेणी में रखा जाता है।
यह कोर्स दो साल से अधिक का होता है। जनपद में 2020 में मिले 22 एमडीआर रोगियों समेत संख्या 244 और एक्सडीआर रोगियों की संख्या 27 पहुंच गई है।
सरकारी अस्पतालों में आए टीबी रोगी
| वर्ष | मरीज (जुलाई तक) |
| 2016 | 4211 |
| 2017 | 4283 |
| 2018 | 5642 |
| 2019 | 6650 |
| 2020 | 2273 |
निजी अस्पतालों में कराया इलाज
| वर्ष | मरीज (जुलाई तक) |
| 2016 | 962 |
| 2017 | 1210 |
| 2018 | 2145 |
| 2019 | 3463 |
| 2020 | 998 |