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हाईकोर्ट ने भी नहीं दी जी समूह को राहत
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 30 May 2014 03:44 PM IST
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जिंदल कंपनी से उगाही के प्रयास मामले में जी न्यूज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा व दो संपादकों को हाईकोर्ट ने भी राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया है।
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अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को उचित ठहराया है जिसमें आरोपियों के खिलाफ धारा 384 व 420 में एक साथ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के फैसले में कोई खामी नहीं है। इससे आरोपियों के खिलाफ पुन: आरोपपत्र दायर करने का रास्ता साफ हो गया है।
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न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने जी न्यूज के संपादकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत ने जो फैसला दिया है, उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। आरोपियों ने याचिका में तर्क रखा था कि उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र में खामियां पाकर ही सीएमएम ने पुन: जांच का आदेश दिया था।
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उन्होंने तीनों के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि जांच में कई खामियां हैं ऐसे में जांच कम से कम एसीपी स्तर के अधिकारी से करवाएं।
पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने 6 जनवरी को दिए फैसले में सीएमएम के फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि आरोपपत्र पर संज्ञान लेने की स्थिति में सीएमएम को ऐसी टिप्पणियां करने का अधिकार नहीं है कि किस धारा में मुकदमा चलेगा या नहीं।
धारा 384 व 420 में एक साथ मुकदमा चलाया जा सकता है। पुलिस ने दायर आरोपपत्र में सुभाष चंद्रा, संपादक सुधीर चौधरी व समीर आहलुवालिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की उगाही का प्रयास, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य नष्ट करने आदि आरोप में कार्रवाई का आग्रह किया था।