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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   No relief for DISCOMs from Supreme Court's interim stay; hearing on the 15th.

Delhi NCR News: सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक से डिस्कॉम्स को राहत नहीं, 15 को होगी सुनवाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 06:57 PM IST
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ऊर्जा मंत्री ने कहा- अंतरिम आदेश केवल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश, ऑडिट को अवैध नहीं ठहराया गया
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रेगुलेटरी एसेट्स पर रोक जारी रहने से उपभोक्ताओं पर फिलहाल संभावित अतिरिक्त वित्तीय बोझ टला

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के सीएजी ऑडिट को लेकर जारी कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सियासी और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि अदालत का अंतरिम आदेश केवल प्रक्रियात्मक है और इससे डिस्कॉम्स को किसी तरह की क्लीन चिट नहीं मिली है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि अदालत ने न तो सीएजी ऑडिट को अवैध बताया, न ही डिस्कॉम्स के पक्ष में कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है। सरकार का कहना है कि ऑडिट की वैधता और अधिकार क्षेत्र पर अंतिम फैसला अगली सुनवाई में होगा। मंत्री ने कहा कि अदालत ने रेगुलेटरी एसेट्स के परिसमापन पर लगी रोक भी अगले आदेश तक जारी रखी है। इससे बिजली उपभोक्ताओं पर संभावित अतिरिक्त वित्तीय बोझ फिलहाल नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे जनहित में महत्वपूर्ण राहत बताते हुए कहा कि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
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ऑडिट से ही आएगी पारदर्शिता
सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार करीब 38,500 करोड़ रुपये के संभावित वित्तीय बोझ की स्वतंत्र जांच चाहती है, ताकि उपभोक्ताओं पर कोई अनुचित भार न पड़े। सीएजी ऑडिट का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और करदाताओं और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। अगर डिस्कॉम्स के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो स्वतंत्र और संवैधानिक सीएजी ऑडिट का विरोध करने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑडिट का लगातार विरोध पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े करता है। सरकार का कहना है कि वह 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत पक्ष रखते हुए यह साबित करेगी कि बिजली क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट आवश्यक है।
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