दिल्ली से हर हाल में हटेंगे 15 साल पुराने वाहन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंद्रह वर्ष से ज्यादा पुराने जिन वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र मिल चुका है उनको भी राजधानी में चलने की इजाजत नहीं होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने मंगलवार को विभिन्न मंत्रालयों व विभागों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट कर दिया है। एनजीटी ने लाखों वाहनों को हटाने में आने वाली समस्या को खारिज करते हुए कह दिया कि फैसले को हर हाल में लागू करना होगा। इसके अलावा एनजीटी पूरे एनसीआर में ऐसे वाहनों पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है।
एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ के साथ मंगलवार को शहरी विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सड़क एवं परिवहन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण बोर्ड, पेट्रोलियम मंत्रालय, दिल्ली यातायात पुलिस, तीनों एमसीडी आयुक्त, दिल्ली परिवहन विभाग सहित 18 मंत्रालयों व विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। यह बैठक 26 नवंबर को दिए गए फैसले को लागू करने के संबंध में बुलाई गई थी।
बैठक में सभी अधिकारियों ने इस फैसले को लागू करने में आने वाली समस्याएं रखीं। एनजीटी को बताया गया कि 15 वर्ष पुराने लाखों वाहन हैं और उनको जब्त कर रखा कहां जाएगा। इसके अलावा जिन वाहन मालिकों ने फिटनेस प्रमाणपत्र ले लिया है उनको कैसे रोका जाए। परिवहन विभाग ने कहा कि वाहनों को जब्त करने व चालान करने के लिए पर्याप्त ढांचा नहीं है।
आज से शुरू हो सकता है वाहनों को हटाने का काम
पर्यावरण विभाग ने कहा कि सिर्फ दिल्ली में 15 वर्ष पुराने वाहनों पर रोक लगाने से कुछ नहीं होगा क्योंकि एनसीआर में चलने वाले वाहन दिल्ली में आएंगे। ऐसे में फैसले का दायरा बढ़ाकर पूरे एनसीआर में इसे लागू किया जाए।
एनजीटी पीठ ने सभी के सुझाव लेने के बाद स्पष्ट कर दिया कि फैसलों को सख्ती से लागू करना होगा। जिन वाहनों ने फिटनेस प्रमाणपत्र ले लिया है, वो भी जब्त होंगे। पूृरे एनसीआर पर फैसला लागू करने के बारे में बाद में निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया कि पुराने वाहनों को हटाने के अलावा दिल्ली के रास्ते दूसरे राज्यों में जाने वाले वाहनों के लिए बाईपास बनाने, हर प्रवेश द्वार पर स्वचालित व सेंसर ब्रिज लगाने ताकि तय सीमा तथा तय वजन से बाहर के वाहन न आ पाएं, 15 वर्ष पुराने वाहनों के पब्लिक क्षेत्र में पार्किंग पर रोक, शिकायतों के लिए पोर्टल बनाने, सभी बाजार व भीड़ वाले क्षेत्रों में प्रदूषण जांच यंत्र लगाने के फैसलों को सख्ती से लागू किया जाए।
दिल्ली परिवहन विभाग तैयारी में जुटा
राजधानी में पंद्रह साल पुराने वाहनों को हटाने का काम बुधवार से शुरू हो सकता है, क्योंकि एनजीटी की मंगलवार को आयोजित बैठक में पुराने वाहनों को जल्द से जल्द हटाने का निर्देश दिया है। खास बात यह है कि विभागों को एक महीने के बाद अदालत में शपथपत्र के माध्यम से कार्रवाई की रिपोर्ट भी देने को कहा गया है। पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग खाका तैयार करने में जुटा है, ताकि आदेश के तहत बुधवार से काम शुरू किया जा सके।
दिल्ली परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, सड़कों पर ऐसे 28 लाख वाहन हैं जो 15 साल को पार कर चुके हैं। इसमें एक भी कमर्शियल वाहन नहीं है। इस आदेश का सबसे ज्यादा असर दिल्ली में निजी वाहन चालकों पर पड़ेगा। वर्तमान में दिल्ली में 15 साल पुराने वाहनों को री-फिटनेस के बाद चलने की मंजूरी मिलती है। चालक को 15 साल बाद परिवहन विभाग के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों से पांच साल का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है।
ऑटो पर आदेश का इसलिए कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि दिल्ली में पहले से ही 15 साल पुराने वाहनों को चलने की मंजूरी नहीं है। 15 साल बाद उसे स्क्रैप करवाना अनिवार्य है फिर उसी परमिट पर चालक को दोबारा नया ऑटो निकलवाना पड़ता है। ऐसे में इस आदेश का सबसे ज्यादा असर निजी वाहन चालकों पर ही पड़ने वाला है।
दिल्ली में बीते कुछ सालों में तेजी से वाहनों की संख्या बढ़ी है। वर्तमान में दिल्ली में 82 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड है। एनजीटी ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली की सड़कों से 15 साल पुराने वाहनों को हटाने का आदेश दिया है।