फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   No decision taken from farmer unions on invitation of central government for talk on farm bills

सरकार से वार्ता के लिए तय नहीं हुई तारीख, अपनी मांग पर डटे हैं अन्नदाता, किसान बोले- अब आर-पार की लड़ाई

Tue, 22 Dec 2020 12:48 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 22 Dec 2020 12:48 AM IST
विज्ञापन
No decision taken from farmer unions on invitation of central government for talk on farm bills
कृषि कानूनों का विरोध करते किसान - फोटो : amar ujala

केंद्र सरकार की ओर से किसानों को बातचीत के लिए आमंत्रण पर किसान यूनियनों की तरफ से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। किसान नेता दर्शन पाल के ई-मेल के जवाब में किसान यूनियनों से चर्चा के बाद बातचीत के लिए अपनी सुविधा के अनुसार तारीख चुनने का विकल्प मांगा है। हालांकि लंबे समय से अपनी मांगों पर डटे किसानों के रुख को देखकर फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा है कि किसान सरकार से बातचीत के लिए जल्द तैयार होंगे।

विज्ञापन


20 दिसंबर को पांच पन्नों के भेजे गए पत्र में कृषि संबंधित विभिन्न पहलुओं पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है। भाकियू(राजेवाल)के सचिव ओंकार सिंह ने कहा कि इसमें कोई नई बात नहीं है। किसानों पहले की तरह अपनी मांगों पर डटे हुए हैं, एकमात्र मांग कृषि कानूनों को रद्द करने की है। 
विज्ञापन


8 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक हुई थी। इसके एक दिन दोबारा बातचीत के प्रस्ताव को किसानों ने खारिज कर दिया था। सरकार की ओर से वार्ता के आमंत्रण दिया गया, लेकिन किसानों ने भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी। आगे भी 27 दिसंबर तक किसानों ने अपने विरोध की रुपरेखा तय कर दी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

किसानों ने की भूख हड़ताल, कहा- ये अब आर-पार की लड़ाई

कृषि कानूनों के विरोध में 26 दिनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। उनका हौसला हर दिन बढ़ रहा है। सोमवार को किसानों ने उनकी मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी। सुबह 11 बजे से 11 किसान गाजीपुर प्लाईओवर के ऊपर बने मंच पर हड़ताल पर बैठ गए। शाम पांच बजे तक यह जारी रही। इस दौरान मंच से अन्य किसान नेताओं का संबोधन भी चलता रहा।

किसानों ने कहा कि अब ये आर-पार की लड़ाई है। सरकार को उनकी मांग माननी ही होगी। किसानों ने कहा कि उनके कई साथी इस आंदोलन में शहीद हुए हैं। इंसाफ की इस लड़ाई में वह आगे भी बलिदान देने को तैयार हैं। जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती पीछे नहीं हटेंगे। हड़ताल आगे भी जारी रहेगी। 

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा देश के अलग-अलग हिस्सों से जो लोग आंदोलन में आना चाहते हैं। सरकार उनको रोक रही है। ऐसा करके केंद्र किसानों के हौसले को कम करना चाहता है, लेकिन यह मंशा वह पूरी नहीं होने देंगे।  

राकेश टिकैत ने कहा कि जो किसान कृषि बिलों के समर्थन में रैली निकाल रहे हैं। वह उनसे मिलेगे, और जानकारी लेंगे कि इन नए कानूनों से उनको किस प्रकार से फायदा मिल रहा है।

टिकैत ने कहा कि इन कानूनों में ऐसा क्या लाभ है, जो आंदोलन कर रहे किसानों को पता ही नहीं चल पा रहा। उन्होने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, लेकिन इन कानूनों से किसान घाटे में ही जाएगा।  

किसान नेता डॉक्टर सतनाम सिंह ने कहा कि किसान संगठन हर बार एक उम्मीद के साथ केंद्र सरकार के साथ वर्ता करने जाते हैं,लेकिन कोई समाधान नहीं निकलता है। इस बार सरकार ने फिर से वार्ता के लिए बुलाया है। इस बार उम्मीद है कि कुछ समाधान निकलेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन इसी प्रकार चलता रहेगा। 
 

बॉर्डर जाने वाले मार्ग पर लगा रहा जाम, दिल्ली के लिए रूट डायवर्ट

किसानों के भूख हड़ताल शुरू होने के बाद सिंघु समेत दिल्ली की अन्य सीमाओं के नजदीकी मार्गो पर वाहनों के लिए रूट डायवर्ट कर दिए गए।

सोमवार को सिंघु, औचंदी, पियाउ मनियारी और मंगेश सीमाएं बंद रहीं। यात्रियों को लामपुर, सफियाबाद सहित दूसरे वैकल्कि मार्गों से गंतव्य तक पहुंचने में काफी वक्त लगा। रास्ते में जगह जगह वाहनों का जाम भी लगा रहा। मुकरबा चौक और जीटीके रोड से यातायात को डायवर्ट करने सहित आउटर रिंग रोड से भी लोगों को सलाह दी गई थी। 

दोपहर बाद सिंघु बॉर्डर की तरफ जाने वाले वाहनों का सर्विस रोड पर जाम लग गया जबकि शाम के वक्त रूट डायवजन की वजह से भी बस, ऑटो यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सिंघु बॉर्डर करीब एक किलोमीटर पहले बंद कर दिया गया है जबकि बड़े वाहनों को इससे भी पहले लौटा दिया जा रहा है।

सिंघु बॉर्डर से दिल्ली की तरफ आने के लिए दो किलोमीटर के दायरे में सैकड़ों यात्री पैदल चलते नजर आए। बीच में अगर कोई ऑटो या टैक्सी की सुविधा मिली तो मजबूरत मनमानी किराया चुकाना पड़ा। 

टीकरी बॉर्डर : सरकार चाहे जितनी बतचीत कर ले लेकिन कृषि कानूनों के समाप्ति के अलावा कोई समाधान नहीं 

किसान आंदोलन के 26वें दिन भी टीकरी बॉर्डर पर डटे किसानों के अंदाज में रत्ती भर शिकन नहीं थी। अपने पुराने तेवर में ही किसान नेता मंच से सरकार को ललकार रहे थे। किसान कह रहे थे कि सरकार चाहे जितने दौर की बातचीत कर ले लेकिन तीनों कृषि कानूनों की समाप्ति के अलावा अब आंदोलन का समाधान नहीं होगा। वह दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे, जबतक सरकार उनकी बात नहीं मान लेती।

टीकरी बॉर्डर के मंच पर दिनभर जोशीले भाषणों का दौर जारी था। दूसरी तरफ तेज ठंड के कारण बड़ी संख्या में किसान इधर-उधर बैठे समय काटते नजर आ रहे थे। सोमवार को धूप कम थी तो लोग अलाव और लकड़ी से जलने वाले चूल्हों के पास बैठे थे। मंच के पास ही 15 किसानों का दल भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था। जिनमें से कई किसानों ने हाथों में तख्तियां भी थाम रखी थी। जिस पर कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील लिखी हुई थी। 

कई तख्तियों पर किसानों के बलिदान देने की बात भी लिखी हुई थी। यहां पर पंजाब से पहुचे महिलाओं के एक समूह से बातचीत हुई। परमजीत कौर ने बातचीत के दौरान कहा कि सरकार ने अब हद पार कर दी है। इन बूढ़े किसानों का दर्द उसे दिखाई नहीं दे रहा है। यह सरकार की निरंकुशता को दर्शाता है। यदि सरकार के तेवर नहीं बदले तो वह दिन ज्यादा दूर नहीं है कि बीजेपी की हालत कांग्रेस से भी खराब हो जाएगी। देशवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी उम्मीद थी। 

लेकिन सरकार ने किसानों को इतने दिनों तक दिल्ली की सीमाओं पर बैठाकर अपनी मंशा को जाहिर कर दिया है। यह सरकार गरीबों और किसानों की नहीं है। यह बात जाहिर हो चुका है। इसके बाद महिलाएं इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आगे बढ़ गईं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed