एलजी क्या, हाईकोर्ट की भी नहीं सुनते हैं 'ये'
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हाईकोर्ट के निर्देश और उपराज्यपाल की निगरानी के बावजूद राजधानी के नालों की सफाई को लेकर नगर निगमों का रवैया बेहद ढीला है। दो महीने से भी कम वक्त रह गए हैं मानसून आने में, अब तक केवल 20 फीसदी नालों की सफाई हो पाई है।
इतना कार्य करने में भी निगम को नौ महीने लग गए हैं। इन नौ महीनों में जिन नालों की सफाई हुई भी, उनके 55 फीसदी गाद ही निकाले जा सके हैं।
आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं कि तय अवधि तो दूर मानसून की दस्तक होने तक भी नालों की सफाई का काम पूरा होना असंभव है।
मानसून में जलभराव झेलने को रहें तैयार
उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अपने इलाके के 183 नालों की सफाई का काम पिछले वर्ष एक अगस्त से शुरू किया था। 15 मई तक सभी नाले साफ करने का उसका लक्ष्य था। इन नालों से 10 हजार मीट्रिक टन से अधिक गाद निकलने की संभावना जताई गई थी। अब तक नालों से 57 सौ मीट्रिक टन यानि 55 प्रतिशत गाद ही निकाली गई है। दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने भी पिछले साल एक अगस्त से ही नालों की सर्फाई की शुरूआत की।
अपने इलाके के 259 नालों की सफाई 31 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा, जबकि दिल्ली में आमतौर पर जून के अंत तक मानसून दस्तक दे देता है। अब तक केवल 52 नालों को ही सफाई हुई है। 28 हजार मीट्रिक टन गाद निकलने का अनुमान है, 15 हजार मीट्रिक टन यानि 54 प्रतिशत ही गाद निकाली जा सकी है।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम नालों की सफाई के मामले में अन्य दोनों नगर निगम से कुछ आगे है। उसने नालों से गाद निकालने का कार्य 58 प्रतिशत तक कर लिया है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम का अनुमान है कि उसके 214 नालों में से 46 हजार मीट्रिक टन गाद निकलेगी। वह अब तक साढ़े 26 हजार मीट्रिक टन गाद निकाल चुकी है। उसके 33 नाले पूरी तरह साफ हो गए हैं।