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निठारी कांड: न्यायाधीश ने 114 पेज के फैसले में कोली-पंधेर को बताया समाज के लिए नासूर

Tue, 25 Jul 2017 10:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजियाबाद Updated Tue, 25 Jul 2017 10:38 AM IST
सार

सीबीआई विशेष न्यायाधीश की टिप्पणी:

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nithari case 114 page verdict and judje comment on koli and pandher
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निठारी कांड में घरेलू नौकरानी की हत्या के मामले में सीबीआई विशेष कोर्ट ने दो दिन पूर्व दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को सोमवार दोपहर फांसी की सजा सुनाई। निठारी कांड का इस आठवें फैसले में सुरेंद्र कोली के साथ ही खूनी कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को भी फांसी की सजा सुनाई गई है।
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विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोली पर 35 और पंधेर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने उन्हें अपहरण, रेप, हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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डासना जेल में बंद निठारी कांड के इस मामले में दोषी करार दिए गए मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को सोमवार सुबह 11.27 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई विशेष कोर्ट में पेश किया गया।
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फैसला जानने के लिए सुबह से ही कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगा था। पंधेर की ओर से अधिवक्ता देवराज सिंह और अभियोजन की ओर से सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने सजा पर बहस पूरी की।

इसके बाद न्यायाधीश ने फैसले के लिए दोपहर 12.45 का समय निर्धारित किया। हालांकि फैसला दोपहर करीब एक बजे सुनाया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी सुरेंद्र कोली को वापस डासना जेल ले जाया गया।

सीबीआई विशेष न्यायाधीश की टिप्पणी

nithari case 114 page verdict and judje comment on koli and pandher

अपने 114 पेज के फैसले में विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके  नौकर सुरेंद्र कोली को समाज के लिए नासूर बताया है। उन्होंने कहा है कि ‘खून के बदले खून का सिद्धांत किसी भी सभ्य समाज में लागू नहीं किया जा सकता।

फिर भी राज्य का काम ऐसा समाज बनाना है, जिसे सभ्य और सुसंस्कृत कहा जा सके। यह तभी संभव है जब दोष सिद्ध अभियुक्त जैसे दरिंदे जो सभ्य समाज के लिए नासूर व खतरा बन चुके हैं, को सजा-ए-मौत से दंडित किया जाए।

अभियुक्तों ने हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दीं। एक युवती को काम व अच्छी पगार दिलाने के बहाने सुरेंद्र कोली ने उसे कोठी संख्या डी-5 में बुलाया और अंदर ले जाकर चुन्नी से गला दबाकर उसे बेहोश कर दिया। उसके साथ बलात्कार का प्रयास किया और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

इसके बाद लाश को काट-पीटकर गैलरी और नाले में फेंक देता था तथा मांस के कुछ भाग को पकाकर खा जाता था। अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंधेर ने ऐसे अमानवीय, पाशविक, क्रूर एवं जघन्यतम अवैध कृत्य और आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होकर समाज व राष्ट्र को सदमा पहुंचाया है। ऐसी प्रवृति तो जानवरों में भी नहीं होती।

अभियुक्तगण समाज के लिए खतरा बन चुके हैं। इनमें सुधार और पुनर्वास की संभावनाएं न के बराबर हैं। इस समय भी अभियुक्तगण को अपने द्वारा किए गए अपराध के बारे में कोई प्रायश्चित नहीं है। अभियुक्तों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।’ - पवन कुमार तिवारी, सीबीआई विशेष न्यायाधीश

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