इस तरह रिहा हो जाएगा निर्भया का नाबालिग दोषी
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जैसे जैसे निर्भया गैंगरेप केस के जुवेनाइल दोषी के रिहाई की तारीख नजदीक आ रही है निर्भया के माता-पिता के साथ ही सरकार की चिंता भी बढ़ती जा रही है। सभी इसको लेकर चिंतित हैं कि बाहर आने के बाद उसका व्यवहार फिर किसी को परेशानी में तो नहीं डालेगा।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जुवेनाइल दोषी से एक कानूनी बॉन्ड हस्ताक्षर कराने का निर्णय लिया है। इस बॉन्ड में वो आश्वस्त करेगा कि छूटने के बाद उसका व्यवहार अच्छा रहेगा।
दरअसल निर्भया के मां-बाप की ये मांग थी कि उसे ना रिहा किया जाए क्योंकि बाहर आकर वो फिर वैसा ही कुकृत्य कर सकता है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनिका गांधी ने भी ये चिंता जाहिर की थी जुवेनाइल पर नजर रखी जाए।
'जब कुछ नहीं कर सकती सरकार तो क्या फायदा?'
सभी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए गृहमंत्रालय ने कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के सेक्शन 107 के तहत जुवेनाइल दोषी से हस्ताक्षर कराएगी। ये तब होगा जब वो रिहा होगा।
इस बॉन्ड पर साइन कराने का मतलब ये कि अगर कोई व्यक्ति शांति भंग करता है या जनता को परेशान करने का काम करता है तो मजिस्ट्रेट उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। ये बॉन्ड केवल एक साल के लिए होगा।
हालांकि ये बता दें कि गृह मंत्रालय इस पर अभी विचार कर रहा है कि ये एक उपयुक्त ऑप्शन है या नहीं क्योंकि कानूनी तौर पर उसे सजा पूरी होने के बाद जेल में नहीं रखा जा सकता। गृह मंत्रालय के इस फैसले पर निर्भया की मां ने कहा है कि क्या ये बॉन्ड साइन करने के बाद वो कोई गलत काम नहीं करेगा?
उन्होंने ये भी कहा कि अगर सरकार और कानून कुछ नहीं कर सकते तो इन प्रयासों (बॉन्ड साइन कराने का) का कोई मतलब नहीं है।