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फांसी से बचने के लिए निर्भया के दोषी मुकेश का नया पैंतरा, वकील पर लगाया साजिश का आरोप

Fri, 06 Mar 2020 09:18 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 06 Mar 2020 09:18 PM IST
सार

- मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिर से क्यूरेटिव याचिका दायर करने की अनुमति मांगी

-पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी करते हुए चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए 20 मार्च की तारीख तय की है

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Nirbhaya convict Mukesh filed petition in Supreme Court permission to file curative petition again
निर्भया का दोषी मुकेश सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चौथी बार डेथ वारंट जारी करने के अगले ही दिन निर्भया मामले के दोषी मुकेश ने अब नया पैंतरा चलते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिर से क्यूरेटिव पिटीशन (सुधारात्मक याचिका) और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने की इजाजत मांगी है। 

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मालूम हो कि निर्भया के चारों दोषी अपने तमाम कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल पहले ही कर चुके हैं। इसी बात का ध्यान में रखते हुए वृहस्पतिवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी करते हुए चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए 20 मार्च की तारीख तय की है। 
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वकील मनोहर लाल शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में मुकेश ने अमाइकस क्यूरी पर आरोप लगाया है कि उसे नहीं बताया गया कि क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए तीव वर्ष का वक्त होता है। लिहाजा उसने क्यूरेटिव व दया याचिका फिर से दायर करने की इजाजत दी जाए। 
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मुकेश ने कहा, मेरे खिलाफ रची गई साजिश

मुकेश ने याचिका में कहा है कि उसके खिलाफ साजिश रची गई है। उसे सही जानकारी नहीं दी गई है। लिहाजा उसके मौलिक अधिकार का हनन हुआ है। यहीं वजह है कि उसने रिट याचिका दायर की है। 

याचिका में कहा गया कि लिमिटेशन एक्ट की धारा-137 के तहत याचिका दायर करने की सीमा निर्धारित है। वहीं जिनमें याचिका दायर करने की समय सीमा निर्धारित नहीं है उसमें तीन वर्ष तक का वक्त होता है। लिहाजा क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की समय सीमा तीन वर्ष है। ऐसे में मुकेश के लिए क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की सीमा जुलाई 2021 है। 

याचिका में मुकेश ने आरोप लगाया गया कि अमाइकस क्यूरी ने जबरन दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सुधारात्मक याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि छह दिसंबर 2019 से लेकर तीन मार्च 2020 तक के बीच निर्भया मामले में दिए आदेशों को निरस्त किया जाना चाहिए। साथ ही उसे फिर से सुधारात्मक व दया याचिका दायर करने की इजाजत दी जाए।
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