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निर्भया के दोषियों की फांसी टालते वक्त जज बोले- जब ये भगवान के पास जाएं तो...

Mon, 02 Mar 2020 06:25 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 02 Mar 2020 06:25 PM IST
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Nirbhaya case patiala house court defers execution of convicts till further date say this thing
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला

निर्भया के दोषियों की फांसी तीसरी बार टल गई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक दोषियों की फांसी टाल दी है। दरअसल दोषी पवन की दया याचिका अभी राष्ट्रपति के पास लंबित होने के चलते अदालत ने फांसी टाल दी है। जानिए फैसला सुनाते वक्त अदालत ने क्या कहा...

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फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि भले ही पीड़िता का पक्ष फांसी न टालने के लिए जोर दे रहा है लेकिन मुझे लगता है कि जब दोषी अपने रचयिता(भगवान) से मिले तो इस दुख या क्षोभ के साथ न मिले कि इस देश की अदालत ने उसके साथ सही नहीं किया और कानूनी विकल्प इस्तेमाल करने का फेयर चांस नहीं दिया।
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इसलिए मुझे लगता है कि फांसी तब तक नहीं हो सकती, जब तक दया याचिका लंबित है। इसलिए यह निर्देश दिया जाता है कि तीन मार्च को होने वाली दोषियों की फांसी को अगले आदेश तक रोक दिया जाए।
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अदालत ने आगे कहा कि आदेश की यह कॉपी दोषियों को भी दी जाए। इसके साथ ही दोषियों के वकील, पीड़ित पक्ष के वकील और जेल प्रशासन को भी दी जाए।

आज अदालत में हुई तीखी बहस

  • सुनवाई शुरू हुई तो सरकारी वकील ने कहा कि मैं अक्षय की बात पहले करता हूं। उसने 31 जनवरी को दया याचिका दायर की। उसके अगले ही दिन अक्षय ने सचिवालय में खत लिखा कि उसकी याचिका में कुछ दस्तावेज नहीं है तो उसे वो दस्तावेज फाइल करने की इजाजत दे दी गई।
  • सरकारी वकील ने आगे बताया कि जेल प्रशासन ने सभी जरूरी दस्तावेज याचिका के साथ अटैच किए और तीन फरवरी को राष्ट्रपति को भेज दी। उन्होंने आगे बताया कि तब राष्ट्रपति ने सभी दस्तावेजों को देखा और 5 फरवरी को दया याचिका खारिज कर दी। इसलिए ये कहना कि दस्तावेज अधूरे थे गलत है।
  • सरकारी वकील ने फिर दलील दी कि इस वजह से अक्षय दोबारा दया याचिका नहीं डाल सकता और हमें इस दया याचिका के बारे में कुछ नहीं बताया गया है।
  • तब जज ने पूछा कि अक्षय की दया याचिका खारिज होने के बारे में आपको कब पता चला। तो दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि 5 फरवरी को। इस पर जज ने एपी सिंह से पूछा कि आपने सभी दस्तावेजों वाली पूर्ण दया याचिका कब फाइल की? इस पर सरकारी वकील बीच में बोले कि जज साहब वो पहले से ही कंप्लीट थी। जज को ये भी बताया गया कि 9 जुलाई 2018 को पवन की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई थी।
  • जज ने पूछा किस प्रावधान के तहत अदालत फांसी पर रोक लगा सकती है? तब एपी सिंह बोले दिल्ली जेल नियम 836 के अनुसार।

जारी है...


  • इसके बाद एपी सिंह के वकालतनामे पर बहस करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि आप एपी सिंह के ताजा वकालतनामे को देखिए क्योंकि पहले इन्होंने पवन का वकील होने से मना कर दिया था। अदालत ने इस पर कहा कि बिना मतलब मेरा समय इन बेकार की बातों में खराब किया जा रहा है।
  • अदालत को बताया गया कि चुनाव आयोग के सामने विनय की एक याचिका लंबित है। कहा गया कि दोषी कानून का फायदा उठा रहे हैं और हर तरह से फांसी में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • अदालत ने यह नोट किया कि अक्षय की दया याचिका 31 जनवरी को दायर की गई थी। इसके बाद राष्ट्रपति के सचिव ने गृहमंत्रालय के जरिए जेल प्रशासन को यह निर्देश दिया था कि 1 फरवरी को लिखे एपी सिंह के खत पर अपना जवाब दे कि पूरे कागजात पूर्ण क्यों नहीं हैं।
  • इस पर जेल अधीक्षक ने तीन फरवरी की एक रिपोर्ट अदालत में दी जिसमें बताया गया कि सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए गए थे। इसके साथ ही बताया कि सरकार को अभी तक अक्षय की नई दया याचिका की कोई जानकारी नहीं है।
  • पवन की क्यूरेटिव याचिका के बारे में बताया गया कि ये भी देर दायर की गई है और यह फांसी रोकने का आधार नहीं बन सकता।
  • वहीं सुप्रीम कोर्ट में दोषियों को अलग-अगल फांसी देने की जो याचिका दायर है उसके बारे में खुद उच्चतम न्यायालय ने 14 फरवरी के आदेश में कहा था कि इस कोर्ट में कोई याचिका लंबित हो तो उसका असर फांसी की तारीख पर नहीं पड़ेगा।
  • तब जज बोले कि ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं है जिसके अनुसार फांसी पर रोक लगाई जा सके।
  • दिल्ली कैदी नियम 858 के अनुसार अन्य दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकती जब तक पवन की दया याचिका खारिज नहीं होती। जज ने ये भी कहा कि अक्षय ने पूर्ण याचिका दायर नहीं की थी इसलिए वह नई दया याचिका दायर कर सकता है।
  • निर्भया के वकील ने अदालत को बताया कि एपी सिंह पर बार काउंसिल ने 25000 का फाइन भी लगाया था, इसलिए अदालत उनके नए वकालतनामे को देखे। तब जज ने कहा कि मैं ये नहीं करूंगा।
  • जज ने एपी सिंह से फिर पूछा कि आपको जब दया याचिका खारिज होने के बारे में 5 फरवरी को पता चल गया था तो आपने 29 तारीख तक इंतजार नई याचिका डालने के लिए क्यों किया?
  • एपी सिंह ने कहा मुझे 5 फरवरी को दया याचिका खारिज होने के बारे में नहीं पता था। मुझे ये जेल में पता चला। अक्षय की पत्नी गरीबी रेखा के नीचे आने वाला दस्तावेज तैयार करा रही थी। इस पर जज ने कहा कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? आपने अपने क्लाइंट को फांसी के आखिरी घंटे तक छोड़ दिया और अब याचिका दायर कर रहे हैं?
  • तब एपी सिंह ने कहा कि नहीं जज साहब, मैं दस्तावेजों का इंतजार कर रहा था। तब जज बोले आप अच्छे से कानूनी सहायता नहीं दे रहे।
  • इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दोषियों की फांसी पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी।
  • इसके बाद वकील एपी सिंह ने कुछ देर बाद अदालत को फिर यह बताया कि पवन की दया याचिका दायर की गई है अदालत उसे भी देखे। इस पर अदालत ने पवन की दया याचिका लंबित होने के चलते फांसी अगले आदेश तक के लिए टाल दी।
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