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भारत: अब तक 755 चढ़ाए गए फांसी पर, 58 देशों में दी जाती है फांसी की सजा

Fri, 20 Mar 2020 06:11 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 20 Mar 2020 06:11 AM IST
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nirbhaya case delhi latest news In india 755 hanged to death till death
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
भारत समेत दुनियाभर में फांसी की सजा पर बहस अरसे से चली आ रही है। एक पक्ष जघन्य अपराधों की रोकथाम के लिए मृत्युदंड को जरूरी मानता है तो मानवाधिकावादी मानते है कि अपराधियों पर इस सजा का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। यह बहस हाल ही में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चारों दोषियों की फांसी को लेकर भी उठी थी। एक ओर जहां वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां से दोषियों को माफ करने की अपील की तो दूसरे पक्ष ने उनकी जमकर आलोचना करते हुए दोषियों को तुरंत फांसी पर लटकाने की मांग की।
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1955 में हुए अहम बदलाव
आजादी के बाद ब्रिटिशराज के अधिकांश कानून जस के तस अपनाए गए। 1955 में फांसी से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव हुए, जब संसद ने सीआरपीसी की धारा 367(5) को हटाया। इस धारा में उल्लेख किया गया था कि अगर कोई अपराधी फांसी की सजा वाले अपराध में दोषी सिद्ध हो लेकिन कोर्ट उसे फांसी न दे तो अदालत को अपने आदेश में इसकी वजह बतानी होती थी। 1973 में सीआरपीसी को कई बदलाव कर नये सिरे से लागू किया गया था।
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विधि आयोग ने की फांसी की पैरवी
1967 में विधि आयोग ने अपनी 35वीं रिपोर्ट में मृत्युदंड बरकरार रखने की पैरवी की थी। तब आयोग ने कहा था कि फांसी को ‘आंख के बदले आंख’ की तरह नहीं देखना चाहिए। दरअसल, समाज में लोगों का ऐसा वर्ग है जो निर्दयी और शैतान हैं और सुधर नहीं सकते। तब भारतीय समाज की तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने सजा-ए-मौत  को जरूरी बताया था।
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50 साल बाद की फांसी हटाने की वकालत  
2015 में अपनी 262वीं रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा कि मृत्युदंड अपराधियों में उम्रकैद की तुलना में ज्यादा भय पैदा नहीं करता। इसे प्रतिशोध के स्तर तक नहीं जाना चाहिए। लिहाजा, आतंकवाद और राष्ट्र के खिलाफ युद्ध जैसे अपराधों को छोडक़र अन्य के लिए फांसी की सजा खत्म कर देनी चाहिए।

58 देशों में दी जाती है फांसी की सजा
366 लोगों को फांसी के साथ उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर। अकेले बरेली जिला जेल में ही 130 दोषियों को तख्ते पर लटकाया गया है। दिल्ली की तिहाड़ जेल में अब तक अफलज गुरु समेत 25 अपराधियों को लटकाया गया है।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक

किस राज्य में कितनी सजा-ए-मौत
उत्तर प्रदेश 366
हरियाणा 103
मध्य प्रदेश 78
महाराष्ट्र 56
कर्नाटक 39
प. बंगाल 32
आंध्र प्रदेश 27
दिल्ली 25
पंजाब 10
जम्मू-कश्मीर 05
ओडिशा 05

सजा-ए-मौत के प्रावधान
फांसी देने के तरीके भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग है। 73 देशों में गोली मारने का प्रावधान है।
45 देशों में फ़ायरिंग स्क्वॉयड मौत की सजा को लागू करता है।
जहां तक फांसी का सवाल है, भारत सहित 33 देशों में यह मृत्युदंड का एकमात्र तरीक़ा है।
छह देशों में स्टोनिंग यानी पत्थर मारकर यह दंड दिया जाता है।
पांच देशों में इंजेक्शन देकर यह सजा दी जाती है।
तीन देशों में सिर कलम कर दिया जाता है।

कहां कैसे दी जाती है यह सजा
अफग़़ानिस्तान, सूडान में फ़ायरिंग, फांसी, पथराव
बांग्लादेश, केमरून, सीरिया, युगांडा, कुवैत, ईरान, मिस्र में फ़ायरिंग, फांसी
भारत, मलेशिया, बारबाडोस, बोत्सवाना, तंजानिया, जाम्बिया, जिंबाब्वे, दक्षिण कोरिया में फांसी  
यमन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, थाइलैंड, बहरीन, चिली, इंडोनेशिया, घाना, अर्मीनिया में फ़ायरिंग  
फिलीपींस में इंजेक्शन और चीन में इंजेक्शन, फ़ायरिंग
अमेरिका में इलेक्ट्रोक्यूशन, फांसी, फ़ायरिंग  

बाकी देशों ने पिछले लगभग दस सालों से किसी को मृत्युदंड नहीं दिया। ये देश केवल जंग के समय ही इसका इस्तेमाल करते हैं।
 
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