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निर्भया कांड: मृत्युदंड को चुनौती दे सकते हैं दोषी, मां बोलीं- 'कुछ भी नहीं बदलने वाला है'
Sat, 02 Mar 2019 11:18 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 02 Mar 2019 11:18 PM IST
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फाइल फोटो
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पटियाला हाउस कोर्ट में 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के तीन दोषियों ने मौत की सजा को चुनौती देने के लिए शनिवार को जल्द सुधार याचिका दायर करने का संकेत दिया। दोषियों ने याचिका में कहा कि वे 2017 के मृत्युदंड के फैसले की समीक्षा वाली याचिका को खारिज करने वाले 2018 के आदेश को जल्द चुनौती देंगे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिका ने निर्भया कांड में चार दोषियों की मौत के वारंट को बिना किसी देरी के जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका निर्भया के माता-पिता की ओर से दायर की गई।
दोषियों के वकील एपी सिंह ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल अदालत के 2017 के फैसले की समीक्षा के लिए दायर याचिका को खारिज करने वाले 2018 के आदेश को चुनौती दे सकते हैं।
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वह इस संबंध में जल्द ही सुधार याचिका दायर कर सकते हैं। हालांकि, इस बीच अदालत ने दोषियों को 2017 में दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा। दोषियों के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने याचिका पर अपने जवाब में भी यही बात कही है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिका ने निर्भया कांड में चार दोषियों की मौत के वारंट को बिना किसी देरी के जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका निर्भया के माता-पिता की ओर से दायर की गई।
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दोषियों के वकील एपी सिंह ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल अदालत के 2017 के फैसले की समीक्षा के लिए दायर याचिका को खारिज करने वाले 2018 के आदेश को चुनौती दे सकते हैं।
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वह इस संबंध में जल्द ही सुधार याचिका दायर कर सकते हैं। हालांकि, इस बीच अदालत ने दोषियों को 2017 में दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा। दोषियों के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने याचिका पर अपने जवाब में भी यही बात कही है।
अदालत ने जेल प्रशासन को 6 अप्रैल को अगली सुनवाई के दिन मामले की स्थिति रिपोर्ट दायर करने के निर्देश दिए हैं। इधर, निर्भया के माता-पिता की ओर से दोषियों को जल्द मौत की सजा देने को लेकर दायर याचिका में कहा गया है कि यह वक्त और कानून की मांग है कि जल्द से जल्द और आगे बिना किसी देरी के मौत की सजा दी जाए।
वकील जितेंद्र कुमार झा के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि दोषियों को सजा देने का इंतजार न केवल पूरा देश कर रहा है, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें भारतीय न्यायिक व्यवस्था पर टिकी हैं।
निर्भया कांड के तीन दोषियों मुकेश (31), पवन गुप्ता (24) और विनय शर्मा (25) द्वारा दायर सुधार याचिका को उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल नौ जुलाई को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में दोषियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई मौत की सजा बरकरार रखने के 2017 के आदेश की समीक्षा करने की मांग की थी।
चौथे दोषी अक्षय कुमार सिंह (33) ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में चारों दोषियों को तत्काल मौत की सजा देने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
वकील जितेंद्र कुमार झा के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि दोषियों को सजा देने का इंतजार न केवल पूरा देश कर रहा है, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें भारतीय न्यायिक व्यवस्था पर टिकी हैं।
निर्भया कांड के तीन दोषियों मुकेश (31), पवन गुप्ता (24) और विनय शर्मा (25) द्वारा दायर सुधार याचिका को उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल नौ जुलाई को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में दोषियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई मौत की सजा बरकरार रखने के 2017 के आदेश की समीक्षा करने की मांग की थी।
चौथे दोषी अक्षय कुमार सिंह (33) ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में चारों दोषियों को तत्काल मौत की सजा देने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
नृशंस कांड से सिहर उठा था देश
23 साल की पैरामेडिकल छात्रा से 16-17 दिसंबर की रात में दक्षिण दिल्ली में छह लोगों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया था और उसकी नृशंसता से पिटाई की थी। छात्रा की 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
इस कांड की नृशंसता से दिल्ली ही नहीं, पूरा देश सिहर उठा था। इस मामले के एक आरोपी राम सिंह ने जेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। इस वारदात में शामिल नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह में तीन साल की सजा काटने के बाद छोड़ दिया गया था।
'कुछ भी नहीं बदलने वाला है'
निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि कुछ भी नहीं बदलने वाला है, हजारों कानून बनाए गए हैं और बनाए जाएंगे, लेकिन कोर्ट अपनी गति से काम करेगा। सरकार और कोर्ट से पूछने के लिए एक लड़की को 7 साल में न्याय नहीं मिला, उन सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए कौन उत्तर देगा, जिनसे दुष्कर्म हुआ है।
इस कांड की नृशंसता से दिल्ली ही नहीं, पूरा देश सिहर उठा था। इस मामले के एक आरोपी राम सिंह ने जेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। इस वारदात में शामिल नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह में तीन साल की सजा काटने के बाद छोड़ दिया गया था।
'कुछ भी नहीं बदलने वाला है'
निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि कुछ भी नहीं बदलने वाला है, हजारों कानून बनाए गए हैं और बनाए जाएंगे, लेकिन कोर्ट अपनी गति से काम करेगा। सरकार और कोर्ट से पूछने के लिए एक लड़की को 7 साल में न्याय नहीं मिला, उन सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए कौन उत्तर देगा, जिनसे दुष्कर्म हुआ है।