निर्भया के दोषी मुकेश की नई चाल, हाईकोर्ट में दी सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती
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निर्भया के दोषी मुकेश ने पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मुकेश ने यह दलील देकर फांसी की सजा को रद्द करने की मांग की है कि जब यह घटना हुई तक वह दिल्ली में ही नहीं था। यही याचिका उसने पटियाला हाउस कोर्ट में भी डाली थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके साथ ही उसने तिहाड़ जेल प्रशासन पर उसे प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया। उसकी दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मुकेश की याचर को खारिज कर दिया था।
पटियाला हाउस कोर्ट में क्या हुआ
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र राणा के समक्ष यह याचिका दायर की गई है। उसने याचिका में न्यायाधीश से कहा कि पुलिस ने उसे 17 दिसंबर को राजस्थान से गिरफ्तार किया था, जबकि 16 दिसंबर को घटना हुई थी।
यह याचिका मुकेश सिंह के वकील एमएल शर्मा के माध्यम से दायर की गई है। उन्होंने याचिका में दावा किया है कि घटना के दिन मुकेश दिल्ली में ही नहीं था तो उसे दी गई फांसी की सजा को रद्द किया जाए।
वहीं दूसरी ओर सरकारी वकील ने दलील दी कि यह याचिका फालतू है, जिसके आधार पर दोषी फांसी को टलवाने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद अदालत ने कुछ घंटों तक अपना फैसला सुरक्षित रखा और शाम को अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
निर्भया के चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र राणा ने ही 5 मार्च को चौथा डेथ वारंट जारी किया था। इस डेथ वारंट के तहत चारों दोषियों को 20 मार्च की सुबह साढ़े 5 बजे फांसी दी जानी है।
इससे पहले दोषियों के कानूनी विकल्पों के तहत याचिकाओं के लंबित होने के कारण पटियाला हाउस कोर्ट तीन बार दोषियों के डेथ वारंट को स्थगित किया जा चुका है। अब दोषी चौथे डेथ वारंट को भी स्थगित करवाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को ही निर्भया के तीन दोषियों विनय, पवन और अक्षय की ओर फांसी की सजा पर रोक लगाने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में गुहार लगाई गई है।
इस याचिका में दोषियों के वकील एपी सिंह ने तीनों दोषियों के परिवारों द्वारा राष्ट्रपति को दी गई इच्छामृत्यु की अनुमति की अर्जी समेत उनकी आर्थिक स्थिति को विस्तार से बताया है। याचिका में मांग की है कि दोषियों के परिवारों में बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी हैं, जिनका भरण पोषण दोषियों पर ही है और अगर दोषियों को फांसी दी गई तो उनके परिवार भी उजड़ जाएंगे।
सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें मुकेश ने अपनी अमीकस क्यूरी वृंदा ग्रोवर पर क्यूरेटिव याचिका दायर करने के संबंध में अधूरी जानकारी देने का आरोप लगाया गया था।
इसके साथ ही मामले की सीबीआई द्वारा जांच करवाने की मांग की गई थी। इस याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई भी तथ्य सुनवाई योग्य नहीं है।
इसके अलावा मुकश ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से क्यूरेटिव याचिका दायर करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश की रिव्यू पिटिशन को 9 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया था और उसकी दया याचिका को राष्ट्रपति द्वारा खारिज कर दिया गया था।
इस मामले के नाबालिग आरोपी को घटना के बाद बाल सुधार गृह में तीन साल की सजा काटने के बाद 2015 में छोड़ दिया गया था, जबकि मामले में छठे आरोपी रामसिंह ने गिरफ्तार होने के कुछ दिन बाद ही तिहाड़ जेल में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी।