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Delhi: जन्मजात बीमारियों से ग्रसित दिव्यांग बच्चों को मिलेगा सामान्य जीवन, ये है पहला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर

Tue, 19 Dec 2023 08:31 AM IST
अनुज कुमार आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 19 Dec 2023 08:31 AM IST
सार

दिल्ली के पहले डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में ऐसे बच्चों का नौ तरह की क्लीनिकल और मनोवैज्ञानिक पद्धतियों से उपचार हो रहा। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए शाहदरा में एमसीडी के दयानंद अस्पताल में इनकी देखभाल, सहायता और उपचार की मौजूदा समय फ्री में सुविधा उपलब्ध है।

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Nine types of treatment are being provided in Delhi's first Early Intervention Center
दयानंद अस्पताल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जन्म के समय के दोषों, बीमारियों, विकास में देरी और दिव्यांगता जैसी समस्याओं की शीघ्र पहचान कर बच्चों को सामान्य जीवन जीने के अवसर दिए जा रहे। दिल्ली के पहले डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में ऐसे बच्चों का नौ तरह की क्लीनिकल और मनोवैज्ञानिक पद्धतियों से उपचार हो रहा। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए शाहदरा में एमसीडी के दयानंद अस्पताल में इनकी देखभाल, सहायता और उपचार की मौजूदा समय फ्री में सुविधा उपलब्ध है।

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डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकारों की जांच कराने और इसके इलाज में खर्च और समय दोनों ज्यादा लगता है। इस तरह के मामलों की ज्यादातर देरी से उपचार शुरू कराने के कारण समस्या बढ़ जाती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को सीखने, बोलने और सुनने में कठिनाई होती है और किसी सब्जेक्ट को ध्यान से देखने में समस्या होती है। पूर्वी दिल्ली में निगम के डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में पीड़ितों को दवाइयों के साथ-साथ विशेष थेरेपी से उपचार हो रहा। बच्चों की स्पीच और हीयरिंग थेरेपी कराई जा रही। आंखों के चश्मे लगाए जा रहे और दांतों की सर्जरी करने की भी व्यवस्था है।
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सामान्य जीवन देने के लिए प्रशिक्षित टीम
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ये केंद्र खोला गया है। यहां जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की जांच के लिए प्रशिक्षित फिजियोथिरेपिस्ट, न्यूट्रीशियन, स्पेशल एजूकेटर्स की तैनाती की गई है। सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ सुरेन्द्र सिंह बिस्ट ने बताया कि कुछ बच्चों में जन्मजात डाउन सिंड्रोम की समस्या होती है, लेकिन कई बच्चे जन्म के बाद चोट के कारण इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं। ये बच्चे सामान्य बच्चों से अलग व्यवहार करते हैं। इनकी विकास की दर भी बाधित रहती है। ऐसे बच्चों का इलाज कर इन्हें सामान्य जीवन देने के लिए ये सेंटर काम कर रहा।
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बच्चों की काउंसलिंग और इलाज दोनों फ्री
डॉ सुरेन्द्र सिंह बिस्ट ने बताया कि इस सेंटर में मनोवैज्ञानिक बच्चों की मानसिक और बौद्धिक क्षमता को जांचते हैं। बच्चों के अलग-अलग स्केल होते हैं, इसी के लिहाज से इनका इलाज किया जाता है। हर दिन 5-6 बच्चों की मनोवैज्ञानिक जांच होती है। करीब 25-30 बच्चों की हर दिन थेरेपी की जाती है। दिल्ली सरकार के प्राइमरी स्कूलों के स्पेशल एजूकेटर भी स्कूलों से बच्चों की स्क्रीनिंग कराने आते हैं। अधिकतर बच्चों को सीखने, समझने में समस्या आती है। कई बच्चों को गुस्सा जल्दी आता है। अबतक 200 से अधिक ऐसे बच्चों की काउंसलिंग कर इनका इलाज किया गया है।


बिना देरी बीमार बच्चों को सेंटर लाने की जरूरत
दयानंद अस्पताल के एमएस डॉ आनंद प्रकाश नारनौलिया ने कहा, दिल्ली में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर चल रहा है। इसकी दिल्ली वासियों को कम जानकारी है। जिन बच्चों में डाउन सिंड्रोम ऑटिज्म की समस्या हो, इन्हें बिना देर किए इलाज के लिए लाना चाहिए। जल्द इलाज शुरू कराने पर बच्चे जल्द सामान्य बच्चों के जैसे हो सकते हैं। बच्चों को खेल-खेल में सिखाने और समझाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम है।

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