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Delhi High Court: 'अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दी जाए फांसी', एनआईए ने दिल्ली हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा

Fri, 26 May 2023 10:52 PM IST
आकाश दुबे पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 26 May 2023 10:52 PM IST
सार

मलिक को जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया था। मलिक को विशेष एनआईए अदालत ने पिछले साल मई में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मलिक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
 

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NIA moves High Court to give death penalty to Yasin Malik
यासीन मलिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की है। मलिक को जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया था। मलिक को विशेष एनआईए अदालत ने पिछले साल मई में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मलिक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।

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जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस तलवंत सिंह की खंडपीठ सोमवार को अपील पर सुनवाई करेगी। एनआईए ने तर्क रखा है कि दोषी को सज सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया है उसका अपराध राष्ट्र द्रोष की श्रेणी में आता है। इसके अलावा दोषी के कृर्त्य रेयरेस्ट ऑफ द रेयरेस्ट में आते है। विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा था कि यह अपराध सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित रेयरेस्ट ऑफ द रेयरेस्ट केस की कसौटी पर खरा नहीं उतरा।

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न्यायाधीश ने मलिक की इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि उन्होंने अहिंसा के गांधीवादी सिद्धांत का पालन किया था और एक शांतिपूर्ण अहिंसक संघर्ष का नेतृत्व कर रहे थे। हालाँकि, जिन सबूतों के आधार पर आरोप तय किए गए थे और दोषी ने अपना दोष स्वीकार किया था। अदालत ने कहा था कि पूरे आंदोलन को एक हिंसक आंदोलन बनाने की योजना बनाई गई थी और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई यह तथ्य की बात है। मुझे यहां ध्यान देना चाहिए कि दोषी महात्मा का आह्वान नहीं कर सकता और उनका अनुयायी होने का दावा नहीं कर सकता क्योंकि महात्मा गांधी के सिद्धांतों में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं थी, चाहे उद्देश्य कितना भी बड़ा क्यों न हो।

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अदालत ने पिछले साल मार्च में इस मामले में मलिक और अन्य के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप तय किए थे। अन्य जिन पर आरोप लगाया गया था और मुकदमे का दावा किया गया था, वे हाफिज मुहम्मद सईद, शब्बीर अहमद शाह, हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सलाहुद्दीन, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद शाह वटाली, शाहिद-उल-इस्लाम, अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश, नईम खान, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे है। हालांकि, अदालत ने कामरान यूसुफ, जावेद अहमद भट्ट और सैयदा आसिया फिरदौस अंद्राबी नाम के तीन लोगों को आरोप मुक्त कर दिया था।

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