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फिर सामने आया हापुड़ से आतंकी कनेक्शन, टुंडा के बाद एक ताजा हुईं कड़वी यादें
Thu, 27 Dec 2018 05:20 PM IST
शाहरुख खान
नितिन दीक्षित, अमर उजाला, हापुड़
नितिन दीक्षित, अमर उजाला, हापुड़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 27 Dec 2018 05:20 PM IST
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अब्दुल करीम टुंडा, डेविड हेडली के साथी तहव्वुर राणा जैसे मोस्टवांडेट आतंकियों से रिश्ते, सेटेलाइट फोन की दो बार लोकेशन मिलने के लिए बदनाम रहे हापुड़ जिले का एक बार फिर आतंकी कनेक्शन सामने आने से हड़कंप है। एनआईए और एटीएस की टीमों द्वारा बुधवार को जिले में की गई कार्रवाई ने पुरानी कड़वी यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
पिलखुवा के मोहल्ला अशोक नगर के लोगों को 19 जनवरी 1994 की वह सर्द रात आज भी याद है, जब रात के सन्नाटे को चीरती हुई दिल्ली पुलिस की गाड़ियां मोहल्ले में पहुंची थीं। बाद में पता चला कि यह टीम लश्कर ए तैयबा के आतंकी अब्दुल करीब टुंडा की तलाश में आयी थी, जो यहां का निवासी था।
मामूली मारपीट और तमंचा रखने के आरोप में 1968 में पिलखुवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद टुंडा अचानक गायब हो गया था। इतने साल बाद उसके इस रूप में सामने आने से पूरा जिला सकते में आ गया था। यह पहला मामला था जब किसी आतंकी का जिले से रिश्ता सामने आया था।
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इसके बाद हापुड़ में इस प्रकार की गतिविधियां सामने आती गईं। 28 नवंबर 2011 की शाम 7.28 बजे पाकिस्तान के बार्डर पर सेना के आईटी विशेषज्ञों ने एक सेटेलाइट फोन को ट्रेस किया था।
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पिलखुवा के मोहल्ला अशोक नगर के लोगों को 19 जनवरी 1994 की वह सर्द रात आज भी याद है, जब रात के सन्नाटे को चीरती हुई दिल्ली पुलिस की गाड़ियां मोहल्ले में पहुंची थीं। बाद में पता चला कि यह टीम लश्कर ए तैयबा के आतंकी अब्दुल करीब टुंडा की तलाश में आयी थी, जो यहां का निवासी था।
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मामूली मारपीट और तमंचा रखने के आरोप में 1968 में पिलखुवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद टुंडा अचानक गायब हो गया था। इतने साल बाद उसके इस रूप में सामने आने से पूरा जिला सकते में आ गया था। यह पहला मामला था जब किसी आतंकी का जिले से रिश्ता सामने आया था।
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इसके बाद हापुड़ में इस प्रकार की गतिविधियां सामने आती गईं। 28 नवंबर 2011 की शाम 7.28 बजे पाकिस्तान के बार्डर पर सेना के आईटी विशेषज्ञों ने एक सेटेलाइट फोन को ट्रेस किया था।
बड़ी बात थी कि इसकी लोकेशन हापुड़ मुख्यालय से साउथ ईस्ट दिशा में 19 किलोमीटर दूर मिली थी। इस फोन से कुल 8 मिनट 44 सेकेंड बात की गई। अगले दिन इसकी लोकेशन आगरा में मिली थी। इसके बाद जिले में खुफिया एजेंसियों ने खोजबीन की थी। इसके अलावा 14 जनवरी 2012 को भी सेटेलाइट फोन की लोकेशन बुलंदशहर, हापुड़ और मेरठ के रास्ते पर मिली थी।
इसके बाद लश्कर ए तैयबा के अमेरिका निवासी आतंकी डेविड हेडली की वर्ष 2013 में गिरफ्तारी के बाद उसने इस बात का खुलासा कर सबको चौंका दिया था, उसका साथी तहव्वुर राणा अपनी बीबी समराज राणा के साथ 13 नवंबर 2008 को पहले मेरठ के शकूर नगर और इसके बाद हापुड़ के मोहल्ला मजीदपुरा आकर रुका था।
जानकारी मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने यहां छापेमारी भी की थी। हालांकि इस छापेमारी में कुछ हाथ नहीं आया था। कुल मिलाकर हापुड़ जिले का आतंकियों के पुराना कनेक्शन रहा है।
एक और मामला सामने आने के बाद जिला खुफिया एजेंसियों के रडार पर तो है ही, लोगों में भी दहशत का माहौल है। जिले का पुलिस प्रशासन भी इसे लेकर सतर्क हो गया है। एएसपी राम मोहन सिंह ने कहा कि जिले में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।
इसके बाद लश्कर ए तैयबा के अमेरिका निवासी आतंकी डेविड हेडली की वर्ष 2013 में गिरफ्तारी के बाद उसने इस बात का खुलासा कर सबको चौंका दिया था, उसका साथी तहव्वुर राणा अपनी बीबी समराज राणा के साथ 13 नवंबर 2008 को पहले मेरठ के शकूर नगर और इसके बाद हापुड़ के मोहल्ला मजीदपुरा आकर रुका था।
जानकारी मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने यहां छापेमारी भी की थी। हालांकि इस छापेमारी में कुछ हाथ नहीं आया था। कुल मिलाकर हापुड़ जिले का आतंकियों के पुराना कनेक्शन रहा है।
एक और मामला सामने आने के बाद जिला खुफिया एजेंसियों के रडार पर तो है ही, लोगों में भी दहशत का माहौल है। जिले का पुलिस प्रशासन भी इसे लेकर सतर्क हो गया है। एएसपी राम मोहन सिंह ने कहा कि जिले में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।