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Delhi NCR News: गंगा किनारे निर्माण मामले में एनजीटी सख्त, एनएमसीजी से मांगा बाढ़ क्षेत्र तय करने का आधार
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नई दिल्ली। गंगा नदी के किनारे हो रहे निर्माण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से बाढ़ क्षेत्र के निर्धारण को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। एनजीटी ने पूछा है कि बाढ़ क्षेत्र तय करने के लिए 1-इन-5 वर्ष और 1-इन-25 वर्ष की बाढ़ अवधि को आधार क्यों बनाया गया। यह मामला वाराणसी में गंगा किनारे श्री वारी केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से किए जा रहे निर्माण से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अनुराग सिंघल ने आरोप लगाया है कि यह निर्माण गंगा संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनएमसीजी ने बताया कि उसने वाराणसी जिला गंगा समिति से संबंधित क्षेत्र में बाढ़ क्षेत्र के वर्तमान सीमांकन की जानकारी मांगी है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से तकनीकी अध्ययन कराने का अनुरोध किया गया है। एनजीटी ने कहा कि गंगा संरक्षण से जुड़े 2016 के आदेश में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। अधिकरण ने एनएमसीजी से चार सप्ताह के भीतर संबंधित दस्तावेज और तकनीकी दिशानिर्देश पेश करने को कहा है। अदालत ने जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को भी मामले में शामिल करने की अनुमति दे दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। ब्यूरो
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मामले की सुनवाई के दौरान एनएमसीजी ने बताया कि उसने वाराणसी जिला गंगा समिति से संबंधित क्षेत्र में बाढ़ क्षेत्र के वर्तमान सीमांकन की जानकारी मांगी है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से तकनीकी अध्ययन कराने का अनुरोध किया गया है। एनजीटी ने कहा कि गंगा संरक्षण से जुड़े 2016 के आदेश में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। अधिकरण ने एनएमसीजी से चार सप्ताह के भीतर संबंधित दस्तावेज और तकनीकी दिशानिर्देश पेश करने को कहा है। अदालत ने जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को भी मामले में शामिल करने की अनुमति दे दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। ब्यूरो
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