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Delhi NCR News: दिल्ली में भूजल में यूरेनियम प्रदूषण पर एनजीटी सख्त, सरकार और डीपीसीसी को बनाया पक्षकार
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83 में से 24 नमूनों में तय सीमा से अधिक यूरेनियम, अगली सुनवाई 24 सितंबर को
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भूजल में यूरेनियम प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को अतिरिक्त प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया है। अधिकरण ने रजिस्ट्री को दोनों पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट-2025 का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में जांचे गए 83 भूजल नमूनों में से 24 में यूरेनियम की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक पाई गई है। इस संबंध में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया।
अधिकरण ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों, जिनमें दिल्ली भी शामिल है, में भूजल में यूरेनियम प्रदूषण की समस्या सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख कारण भूगर्भीय परिस्थितियां, भूजल का अत्यधिक दोहन और एक्वीफर (जलभृत) की विशेषताएं हो सकती हैं। इन तथ्यों को देखते हुए एनजीटी ने दिल्ली सरकार और डीपीसीसी को मामले में पक्षकार बनाने का फैसला किया।
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सुनवाई के दौरान अधिकरण ने बिहार में भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी से जुड़े अपने पूर्व आदेश का भी उल्लेख किया। उस मामले में संयुक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी ने संकेत दिया कि वर्तमान मामले में भी आवश्यक कदमों पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भूजल में यूरेनियम प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को अतिरिक्त प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया है। अधिकरण ने रजिस्ट्री को दोनों पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट-2025 का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में जांचे गए 83 भूजल नमूनों में से 24 में यूरेनियम की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक पाई गई है। इस संबंध में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया।
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अधिकरण ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों, जिनमें दिल्ली भी शामिल है, में भूजल में यूरेनियम प्रदूषण की समस्या सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख कारण भूगर्भीय परिस्थितियां, भूजल का अत्यधिक दोहन और एक्वीफर (जलभृत) की विशेषताएं हो सकती हैं। इन तथ्यों को देखते हुए एनजीटी ने दिल्ली सरकार और डीपीसीसी को मामले में पक्षकार बनाने का फैसला किया।
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सुनवाई के दौरान अधिकरण ने बिहार में भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी से जुड़े अपने पूर्व आदेश का भी उल्लेख किया। उस मामले में संयुक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी ने संकेत दिया कि वर्तमान मामले में भी आवश्यक कदमों पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित की गई है।