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Delhi NCR News: जल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी पर एनजीटी सख्त
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सीजीडब्ल्यूए को दिए आदेश, जानकारी को टेबल बनाकर करें पेश
- सुनवाई के दौरान सीजीडब्ल्यूए ने छह हफ्तों का समय मांगा है, ताकि वह उपरोक्त सभी जानकारियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दे सके
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी मामले में सख्ती दिखाई है। अदालत ने केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण (सीजीडब्लूए) को निर्देश दिया कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से दी गई जानकारी को एक टेबल के रूप में पेश करें। इसमें यह स्पष्ट हो कि कितने जिले, गांव और जल स्रोत प्रभावित हैं और क्या कदम उठाए गए हैं। यह भी बताएं कि क्या उन्होंने किसी प्रकार की सलाह या निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, क्या आर्सेनिक व फ्लोराइड हटाने वाले संयंत्र प्लांट उपलब्ध हैं और कहां लगाए जा सकते हैं। मामले में अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।
सीजीडब्ल्यूए ने छह हफ्तों का समय मांगा है, ताकि वह उपरोक्त सभी जानकारियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दे सके। अदालत ने निर्देश दिया कि वह दमन और दीव चार सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट जमा करें। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने रिपोर्ट में बताया कि कितने जिले और गांव इस समस्या से प्रभावित हैं और वहां कितने जल स्रोत हैं। मामले में अदालत ने मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था।
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- सुनवाई के दौरान सीजीडब्ल्यूए ने छह हफ्तों का समय मांगा है, ताकि वह उपरोक्त सभी जानकारियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दे सके
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी मामले में सख्ती दिखाई है। अदालत ने केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण (सीजीडब्लूए) को निर्देश दिया कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से दी गई जानकारी को एक टेबल के रूप में पेश करें। इसमें यह स्पष्ट हो कि कितने जिले, गांव और जल स्रोत प्रभावित हैं और क्या कदम उठाए गए हैं। यह भी बताएं कि क्या उन्होंने किसी प्रकार की सलाह या निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, क्या आर्सेनिक व फ्लोराइड हटाने वाले संयंत्र प्लांट उपलब्ध हैं और कहां लगाए जा सकते हैं। मामले में अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।
सीजीडब्ल्यूए ने छह हफ्तों का समय मांगा है, ताकि वह उपरोक्त सभी जानकारियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दे सके। अदालत ने निर्देश दिया कि वह दमन और दीव चार सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट जमा करें। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने रिपोर्ट में बताया कि कितने जिले और गांव इस समस्या से प्रभावित हैं और वहां कितने जल स्रोत हैं। मामले में अदालत ने मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था।
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