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NGT सख्त, खेतों में पुआल जलाने पर लगी रोक

Thu, 05 Nov 2015 10:14 AM IST
Updated Thu, 05 Nov 2015 10:14 AM IST
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NGT strict on pollution, ban on burning straw in the fields

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और आसमान में छाई मोटी धुंध पर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान में खेतों में फसल कटाई के बाद छूट गए पुआल (अवशेष) को जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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साथ ही कहा है कि जिन राज्यों में पुआल जलाए जाने पर रोक संबंधी अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की गई है, वे तत्काल जारी करें। एनजीटी ने पुआल जलाने पर छोटे, मझोले और बड़े किसानों से 15 हजार रुपये तक पर्यावरण शुल्क अर्थात जुर्माना वसूलने और संबंधित सभी राज्य सरकारों को पुआल निस्तारण के लिए किसानों को मशीन मुहैया कराने का भी आदेश दिया है।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा कि कृषि अवशेषों को जलाना एक गंभीर मामला है क्योंकि इससे ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है।

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बच्चों और अन्य लोगों की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं

NGT strict on pollution, ban on burning straw in the fields

ऐसा करने वाले लोग बच्चों और अन्य लोगों की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं और लोग बीमार पड़ रहे हैं। ऐसा करने वाले लोगों को दूसरों को परेशानी में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

याचिकाकर्ता और एडवोकेट वर्धमान कौशिक व एडवोकेट भक्ति परसीजा सेठी ने एनजीटी को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की वेबसाइट के हवाले से बताया कि दिल्ली में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 व पीएम 10 (हवा में मौजूद बारीक खतरनाक कण), बेंजीन, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें तय मानकों से कई सौ गुना अधिक हैं।

इसके अलावा उत्तर भारत के कृषि प्रधान राज्यों में खेतों में फसल कटाई के बाद पुआल जलाया जा रहा है, इससे जबरदस्त वायु प्रदूषण हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

जलाने पर 15 हजार रुपये तक देना होगा पर्यावरण शुल्क

NGT strict on pollution, ban on burning straw in the fields

एनजीटी ने 2 हेक्टेयर से कम खेत वाले किसानों से पुआल जलाने पर 2500 रुपये पर्यावरण शुल्क वसूलने और 2 से 5 हेक्टेयर तक खेत रखने वाले किसानों से 5000 रुपये व 5 हेक्टेयर से अधिक खेत वाले किसानों से 15,000 रुपये वसूलने को कहा है।

एनजीटी ने पुआल निस्तारण के लिए संबंधित सरकारों को तीन स्तरों पर किसानों को मशीन मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। मसलन, 2 हेक्टेयर से कम खेत वाले किसानों को मुफ्त में मशीन मुहैया कराई जाएगी।

वहीं 2 से 5 हेक्टेयर तक खेत वाले किसानों को 5000 रुपये और 5 हेक्टेयर से ज्यादा खेतिहर जमीन रखने वाले किसानों को 25,000 रुपये में मशीन मुहैया कराने को कहा है।

किसानों में फैलाई जाए जागरूकता

NGT strict on pollution, ban on burning straw in the fields

एनजीटी ने आदेश में कहा कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी अपने क्षेत्र में भ्रमण करें और ग्राम पंचायतों से समन्वय स्थापित कर किसानों के बीच पुआल न जलाने के लिए जागरूकता फैलाएं।


इसके लिए तय समय पर किसानों के साथ मीटिंग करें और पंफलेट बांटने के साथ अन्य गतिविधियों के जरिए किसानों को समझाएं कि पुआल जलाने से वायु प्रदूषित होती है। साथ ही सेहत को भी नुकसान पहुंचता है।

एनजीटी ने इन पांच राज्यों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण और वायु गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट तैयार करें। साथ ही प्रदूषण बोर्ड तय मानकों पर रिपोर्ट का विश्लेषण कर उसके समक्ष पेश करें।

धुंध का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव

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अक्तूबर से नवंबर माह के शुरुआती दिनों के बीच धान की कटाई की जाती है। इसके बाद जल्द से जल्द गेहूं का खेत तैयार करने के लिए किसान अक्सर खेतों में बचे धान के अवशेषों को आग लगा देते हैं।

धान के खेत में इस तरह से आग लगाने से हवा में जो धुआं फैलता है, वह वनस्पति, पशुओं और मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। धुएं से जो गैस बनती है, वह वातावरण को गर्म करती है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है।

खेत जलाने से भूमि की भौतिक, रसायनिक और जैविक दशा पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। मौसम में ठंड और नमी बढ़ने से यह धुंध घनी होती है। पंजाब और हरियाणा में जलाए जा रहे खेतों से जो धुआं निकल रहा है, वह दिल्ली एवं आसपास के इलाकों की हवा में घुल रहा है। एक अध्ययन के मुताबिक एक टन भूसे को जलाने से 60 किग्रा कार्बन मोनोऑक्साइड, दो किग्रा सल्फर डाई ऑक्साइड उत्पन्न होती है।

धुंध में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और एस्बेस्टॉस तत्वों और गैसों के रासायनिक कण होते हैं। इसकी वजह से कई बीमारियां हो सकती हैं। जैसे सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा, न्यूमोनिया, एम्फसिमा, सिरदर्द, सीने में दर्द, फेफडों का कैंसर समेत अन्य रोग।

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