खनन पर NGT सख्त, तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट
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उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में गंगा व उसकी सहायक नदियों के जुड़ाव क्षेत्र में अवैध बालू खनन को लेकर एनजीटी ने कमेटी गठित की है। बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि यह कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट ट्रिब्युनल के समक्ष रखे।
बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्युनल व अन्य कोर्ट गंगा व उसकी सहायक नदियों में खनन रोकने के लिए पहले भी कई आदेश दे चुके हैं, बावजूद इसके अवैध बालू खनन को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, लिहाजा कमेटी संबंधित क्षेत्रों में खनन की स्थिति, पर्यावरण मंजूरी में बदलाव व अन्य सिफारिशों को लेकर रिपोर्ट देगी।
हरिद्वार व देहरादून के बिशनपुर, गोघपुर और कंदभगमल गांवों में अवैध बालू खनन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका का निपटारा करते हुए एनजीटी ने यह फैसला दिया है।
अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की थी
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को गैर-सरकारी संस्था ‘सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट’ (सेफ) की याचिका का निपटारा किया। याची विक्रांत तोंगड़ की ओर एडवोकेट राहुल चौधरी ने एनजीटी से पर्यावरण मंत्रालय और राज्य सरकार से गंगा में अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की थी।
एनजीटी ने कमेटी में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव व वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून के जरिये नामित वरिष्ठ वैज्ञानिक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जरिये नामित सदस्य, केंद्रीय भू व जल संरक्षण शोध व प्रशिक्षण संस्थान और देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल किए हैं। साथ ही कमेटी का चेयरमैन पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि को बनाया गया है।
ग्रीन बेंच ने अवैध खनन के दायरे को लेकर कमेटी को जांच के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बेंच ने अपने निर्देश में कहा है कि अवैध खनन में शामिल लोगों और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी कमेटी जांच करे।
पर्यावरणीय नुकसान का आकलन भी कमेटी को करना होगा
खनन के कारण होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का आकलन भी कमेटी को करना होगा। पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए क्या उपाय अपनाए जाने चाहिए, साथ ही खनन के लिए पर्यावरण मंजूरी की शर्तों में बदलाव को लेकर सिफारिशें भी दे सकती है। वन्यजीव क्षेत्र के दायरे में माइनिंग लीज संचालन के लिए विशिष्ट उपायों को लेकर भी सिफारिशें मांगी हैं।
मालूम हो कि याची विक्रांत तोंगड़ ने एनजीटी से हरिद्वार, देहरादून व गंगा की अन्य सहायक नदियों में हो रहे अवैध खनन व गढ़वाल विकास निगम लिमिटेड की पर्यावरण मंजूरी पर सवाल उठाया था।
इसके बाद बेंच ने गंगा में अवैध खनन पर रोक के लिए कई बार निर्देश दिए। अब कमेटी इस बात की पड़ताल कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। तीन महीने के भीतर ट्रिब्युनल के समक्ष यह रिपोर्ट पेश की जाएगी। इसके बाद ट्रिब्युनल संबंधित जगह देगा।