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एनजीटी ने यूपी सरकार पर लगाया पांच करोड़ का जुर्माना, वायु और ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती
Mon, 18 Mar 2019 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 18 Mar 2019 05:52 AM IST
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नदियों में प्रदूषण को रोकने में नाकाम उत्तर प्रदेश सरकार पर एनजीटी ने पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि इन नदियों के पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना के क्रियान्वयन पर यह ‘परफॉर्मेंस गारंटी राशि’ खर्च होगी।
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एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी के मुख्य सचिव को सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद जिलों के निवासियों के पेयजल मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने का निर्देश दिया है।
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इस मामले पर यूपी सरकार की अब तक की गंभीर नाकामी और नदियों के प्रदूषण से जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को चिंताजनक बताते हुए पीठ ने कहा कि यह जुर्माना लगाना जरूरी है।
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पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पांच करोड़ रुपये देगी और उसे छह महीने के अंदर इस कार्ययोजना को लागू करना पड़ेगा। यदि कार्ययोजना लागू नहीं हुई तो यह राशि जब्त कर ली जाएगी।
एनजीटी ने मुख्य सचिव को रिटायर्ड जस्टिस एसयू खान की अध्यक्षता वाली समिति को अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। ताकि समिति इन नदियों को अपने मूल स्वरूप में लाने के लिए कार्ययोजना को लागू करने की निगरानी कर सके।
इस समिति में सीपीसीबी और पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। ट्रिब्यूनल द्वारा गठित समिति ने कहा है कि गैर शोधित सीवेज पानी और औद्योगिक कचरे को इन जिलों की नदियों में डालने से ये प्रदूषित हुई हैं।
स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए कोई कदम नहीं उठाया
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन इलाकों में हैंडपंप का दूषित पानी लोग अब भी पी रहे हैं। प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए अधिकारियों ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। इसके साथ ही प्रदूषित पानी पीने से बीमार लोगों की पहचान के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं, ताकि उन्हें मुआवजा दिया जा सके।
124 उद्योगों को बंद करने व केस दर्ज करने का आदेश
एनजीटी ने रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में बहने वाली काली, कृष्णा और हिंडन नदी को प्रदूषित करने वाले 124 उद्योगों को बंद करने और उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। स्वच्छ हवा और पानी को जनता का मूलभूत अधिकार बताते हुए एनजीटी ने इससे पहले इन छह जिलों के डीएम को प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल मुहैया कराने के लिए कार्ययोजना सौंपने का निर्देश दिया था। एनजीओ दोआबा पर्यावरण समिति की याचिका पर पीठ सुनवाई कर रही है।
छह राज्यों को वायु प्रदूषण पर 30 अप्रैल तक कार्ययोजना सौंपने का निर्देश
एनजीटी ने वायु प्रदूषण पर छह राज्यों को 30 अप्रैल तक वायु प्रदूषण पर कार्य योजना सौंपने का निर्देश दिया है। कहा कि यदि निर्धारित समय में कार्ययोजना नहीं सौंपी गई तो प्रत्येक राज्यों पर 1-1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस ए के गोयल ने असम, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तराखंड और नगालैंड सरकारों के मुख्य सचिवों को निर्धारित समय में कार्ययोजना सौंपने का निर्देश दिया है।
सीपीसीबी को ध्वनि प्रदूषण से निपटने की कार्ययोजना बनाने का निर्देश
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पूरे देश में ध्वनि प्रदूषण को लेकर मैप बनाने और इसकी रोकथाम के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण पर कोई नियम नहीं होने के कारण लोगों खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। साथ ही इससे पढ़ाई, नींद और अन्य जायज गतिविधियों में खलल पड़ता है।
एनजीटी के चेयरपर्सन ने सीपीसीबी से कहा है कि वह इसको लेकर एक देशव्यापी मैप तैयार करे और ध्वनि प्रदूषण के मुख्य ठिकानों की पहचान करे और उन शहरों की सूची बनाए। साथ इसके समाधान के लिए तीन महीने में कार्ययोजना सौंपे।
एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस ए के गोयल ने असम, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तराखंड और नगालैंड सरकारों के मुख्य सचिवों को निर्धारित समय में कार्ययोजना सौंपने का निर्देश दिया है।
सीपीसीबी को ध्वनि प्रदूषण से निपटने की कार्ययोजना बनाने का निर्देश
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पूरे देश में ध्वनि प्रदूषण को लेकर मैप बनाने और इसकी रोकथाम के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण पर कोई नियम नहीं होने के कारण लोगों खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। साथ ही इससे पढ़ाई, नींद और अन्य जायज गतिविधियों में खलल पड़ता है।
एनजीटी के चेयरपर्सन ने सीपीसीबी से कहा है कि वह इसको लेकर एक देशव्यापी मैप तैयार करे और ध्वनि प्रदूषण के मुख्य ठिकानों की पहचान करे और उन शहरों की सूची बनाए। साथ इसके समाधान के लिए तीन महीने में कार्ययोजना सौंपे।