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Delhi NCR News: तमिलनाडु गैस लीक मामले में एनजीटी ने सीपीसीबी और अन्य विभागों से मांगा जवाब
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- इस हादसे में दो प्रवासी मजदूरों की हो गई थी मौत, जबकि 60 से अधिक लोगों को अस्पताल में कराया गया था भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में हुई अमोनिया गैस लीक की घटना को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया। इस हादसे में दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि 60 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एनजीटी की पीठ ने कहा कि यह घटना एयर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट, 1981 और एनवायरनमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1986 के प्रावधानों से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है।
एनजीटी ने शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां पाए जाने का जिक्र किया। रिपोर्ट के अनुसार, यूनिट में उचित अलार्म सिस्टम, फायर हाइड्रेंट और कर्मचारियों से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। पीठ ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। इस मामले में पीठ ने सीपीसीबी के सदस्य सचिव, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, पर्यावरण मंत्रालय के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय और तिरुवल्लूर के जिला मजिस्ट्रेट को पक्षकार बनाया है। सभी संबंधित विभागों से हलफनामे के जरिए जवाब मांगा गया है।
हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने हादसे में मारे गए मजदूरों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी है, लेकिन पीठ ने कहा कि पर्यावरण नियमों और सुरक्षा मानकों के पालन की जांच जरूरी है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में हुई अमोनिया गैस लीक की घटना को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया। इस हादसे में दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि 60 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एनजीटी की पीठ ने कहा कि यह घटना एयर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट, 1981 और एनवायरनमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1986 के प्रावधानों से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है।
एनजीटी ने शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां पाए जाने का जिक्र किया। रिपोर्ट के अनुसार, यूनिट में उचित अलार्म सिस्टम, फायर हाइड्रेंट और कर्मचारियों से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। पीठ ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। इस मामले में पीठ ने सीपीसीबी के सदस्य सचिव, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, पर्यावरण मंत्रालय के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय और तिरुवल्लूर के जिला मजिस्ट्रेट को पक्षकार बनाया है। सभी संबंधित विभागों से हलफनामे के जरिए जवाब मांगा गया है।
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हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने हादसे में मारे गए मजदूरों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी है, लेकिन पीठ ने कहा कि पर्यावरण नियमों और सुरक्षा मानकों के पालन की जांच जरूरी है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
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