NGT ने कहा- सीधे यमुना में ना जाए बूचड़खाने का खून, 11 जुलाई से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने सोमवार को दिल्ली सरकार और अन्य नागरिक निकायों को कहा है कि वह ट्रिब्युनल के दिए गए आदेश का पालन करते हुए यह सुनिश्चित करें कि बूचड़खानों से निकलने वाला रक्त सीधे यमुना में न जाए।
एनजीटी ने इस मामले पर सितंबर, 2015 में आदेश दिया था। जब एक धार्मिक समूह की तरफ से यह कहा गया था कि बूचड़खानों से निकलने वाला रक्त सीधा यमुना में प्रवेश करता है और उससे हमारी आस्था को चोट पहुंचती है।
जस्टिस जावद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची मुकेश जैन व स्वामी ओम के मामले में प्राधिकरणों को यह आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान स्वामी ओम को भी प्रधान पीठ ने कहा कि आपके जरिये लगातार शोर किए जाने की वजह से हम इस मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में आप शांत रहें।
11 जुलाई को मांगी डिटेल स्टेटस रिपोर्ट
पीठ ने दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी से कहा है कि वह इस मामले पर 11 जुलाई से पहले विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। पीठ ने टिप्पणी में कहा कि आप लोग रोजाना गंगा और यमुना के बारे में बातचीत करते हैं और हम प्रत्येक दिन इन नदियों में प्रदूषण की बात सुनते हैं। हमने 2015 में आदेश दिया था और आजतक आप लोग इस पर कुछ नहीं कर पाए।
वहीं पूर्वी दिल्ली नगर निगम की ओर से पेश एडवोकेट बालेंदु शेखर ने कहा कि गाजीपुर इलाके में चल रहे बूचड़खाने से निकलने वाले अपशिष्ट की निगरानी के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग उपकरण लगाया गया है। यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से नियंत्रित हैं।