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जिन शौचालयों की जमीन निश्चित की गई वह कहां हैं?

Fri, 26 Feb 2016 10:59 AM IST
Updated Fri, 26 Feb 2016 10:59 AM IST
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NGT's damnation, where are the toilets?

गाजियाबाद में 143 सार्वजनिक शौचालय और 53 सामुदायिक शौचालय बनाने के मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गाजियाबाद नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है।

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ट्रिब्यूनल ने निगम कमिश्नर व हेल्थ ऑफिसर को 18 फरवरी को आदेश दिया था कि वह इस मामले पर हलफनामा दाखिल कर बताएं कि जिन स्थानों पर इन शौचालयों की जगह सुनिश्चित की गई है वह कहां हैं।
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बेंच ने यह निर्देश तब दिया था जब निगम की ओर से काउंसिल ने ट्रिब्यूनल को आश्वासन दिया था कि 143 शौचालयों को लेकर जगह चिह्नित कर ली गई है। साथ ही छह हफ्तों में इसका निर्माण कर दिया जाएगा।
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निगम ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल नहीं किया है

NGT's damnation, where are the toilets?

निगम ने इस संबंध में अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं किया है। बेंच ने निगम के इस बरताव पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है वह एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करे।


जस्टिस एमएस नांबियार की अध्यक्षता वाली बेंच ने पर्यावरणविद शैलेश सिंह के मामले पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण नहीं दिखाई दे रहा जिससे हम 18 फरवरी के आदेश में बदलाव करें।

निगम की ओर से याचिका के साथ लगाई गई स्टेटस रिपोर्ट पर फटकार लगाते हुए बेंच ने कहा यह बहुत ही हैरान करने वाली रिपोर्ट है। टिप्पणी करते हुए कहा कि 143 सार्वजनिक शौचालयों की पहचान सिर्फ प्राथमिक चरण में ही की गई है। इसके साथ ही 53 वह जगह जहां सामुदायिक शौचालय स्थलों की पहचान की गई है। दोनों ही शौचालयों में क्या फर्क है यह नहीं बताया गया है।

कमिश्नर ट्रेनिंग पर, इसलिए नहीं दाखिल हुआ हलफनामा

NGT's damnation, where are the toilets?

निगम की ओर से पेश वकील ने कहा कि कमिश्नर ट्रेनिंग पर बाहर गए हुए हैं इसलिए अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं हो पाया है। वहीं बेंच ने कहा कि कमिश्नर की जगह इंचार्ज हलफनामा दाखिल कर 143 सार्वजनिक शौचालयों के बारे में स्पष्ट बताए।


मालूम हो कि जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा शौचालयों के निर्माण पर जारी बिंदुओं को गिनाते हुए गाजियाबाद निगम से कहा था कि प्रति एक वर्ग किमी के दायरे में कम से कम एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण होना चाहिए।

इसके बाद से निगम लगातार बहाने बना रहा है। निगम ने कहा था कि उसने शौचालयों को लेकर जगह चिह्नित कर ली है। अब हलफनामा दाखिल करने के बाद एनजीटी इस मामले पर सुनवाई करेगा।

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