मिलावटी पेट्रोल देने वाले पंपों की आएगी शामत, होगी कार्रवाई
दिल्ली-एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन में हो रही मिलावट के आरोप को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) का सख्त रवैया कायम है। एनजीटी ने संबंधित प्राधिकरणों को दिल्ली-एनसीआर पेट्रोल पंपों की औचक जांच के निर्देश दिए हैं।
ग्रीन बेंच ने कहा कि किन्हीं 10 पेट्रोल पंपों की औचक जांच की जाए। इनसे लिए जाने वाले नमूनों की केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और संबंधित राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशालाओं में सख्त मानकों के साथ जांच होनी चाहिए।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। जांच कमेटी में पेट्रोलियम व गैस मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं।
मिलावट के खतरनाक नतीजे
सुनवाई के दौरान कमेटी द्वारा हाल ही में किए गए तेल नमूनों की जांच की रिपोर्ट पेश की गई। इस पर एनजीटी ने फटकार लगाते हुए कहा कि तेल नमूनों की जांच सीपीसीबी व संबंधित राज्यों की प्रयोगशालाओं में होनी चाहिए न कि निजी प्रयोगशाला में।
याची चेरूब सिंगला ने आरोप लगाया था कि पेट्रोल पंपों में तेलों में केरोसिन की मिलावट की जा रही है। इससे खतरनाक वायु प्रदूषण हो रहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
50 दोपहिया और चार पहिया की हो जांच
ग्रीन पैनल ने प्राधिकरणों को दिल्ली-एनसीआर में 50 दोपहिया और चार पहिया के उत्सर्जन जांच के भी आदेश दिए हैं। प्राधिकरणों से कहा कि वे इन वाहनों की औचक जांच करें।
मिलावट के खतरनाक नतीजे
मालूम हो कि याची चेरूब सिंगला ने मांग थी कि एनजीटी देश भर के पेट्रोल पंपों की जांच के लिए निर्देश जारी करे। याची ने कहा था कि खासतौर से उन शहरों में पेट्रोल पंपों की जांच जरूर होनी चाहिए जो वायु प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। याची का आरोप था कि ईंधन में मिलावट से कई तरह की हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में खतरनाक इजाफा हो रहा है। याची ने मिलावट करने वालों के खिलाफ जुर्माना और कड़ी कार्रवाई की भी मांग की थी।