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निर्माण कार्य के लिए भूजल दोहन के कायदे-कानून करें सख्त: एनजीटी

Sat, 28 Jul 2018 11:09 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Jul 2018 11:09 PM IST
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ngt order Strict enforcement of groundwater harness for construction work
ngt

राजधानी में गहराते जल संकट को देखते हुए इमारतों के निर्माण कार्य के लिए किए जा रहे भू-जल का दोहन पर रोक लगाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। इसके अलावा भूजल दोहन के लिए कड़े नियम बनाने और वैज्ञानिक प्रक्रिया लागू करने के लिए भी कवायद शुरू कर दी है।

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खासतौर से भवन निर्माण के लिए भू-जल दोहन मामले में विस्तृत गाइडलाइन बनाने के लिए एनजीटी ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के संबंधित एक्सपर्ट को तलब किया है। वहीं, इस संबंध में एनजीटी ने सभी विभागों से 29 अगस्त तक सुझाव भी मांगा है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची विक्रांत तोंगड़ के मामले में यह आदेश दिया है।
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पीठ ने 16 नवंबर 2015 को भू-जल संबंधी जारी गाइडलाइन पर गौर किया है और इसे विस्तार देने के लिए एक्सपर्ट को तलब किया। केंद्रीय भूृ-जल प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि इस संबंध में गाइडलाइन के प्रारूप पर इसे तैयार किया जा रहा है। पीठ ने यह भी कहा है कि हमें अगली पीढ़ी के लिए भी जल संचयन करना जरूरी है।
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ऐसे में वर्षा जल का संचयन, भंडारण और अन्य पहलुओं पर विस्तार से विचार करना चाहिए। पीठ ने यह गौर किया कि भू-जल दोहन का मामला सिर्फ एनसीआर से जुड़ा हुआ नहीं है यह पूरे देश से जुड़ा है। पानी की उपलब्धता सभी के लिए बुनियादी जरूरत है। पानी का इस्तेमाल सतत विकास मॉडल के आधार पर होना चाहिए। 

हरियाणा ने बताया भवन निर्माण में कितने पानी की जरूरत 
31 मई के आदेश का अनुपालन करते हुए हरियाणा के कंट्री टाउन एंड प्लानिंग विभाग के टाउन प्लानर ने एनजीटी में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि पांच मंजिला इमारत के लिए 750 लीटर प्रति वर्ग मीटर पानी की जरूरत होती है। वहीं, पांच से ज्यादा और 10 मंजिला इमारत के लिए 1000 लीटर प्रति वर्ग मीटर, 10 से ज्यादा और 20 मंजिला भवन निर्माण के लिए  1500 लीटर प्रति वर्ग मीटर और 20 मंजिला से ऊपर भवन के लिए 2000 लीटर प्रति वर्ग मीटर जल इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है।


भवन के आकार के आधार पर मंजूरी का आदेश
एनजीटी को इस मामले में बताया गया है कि 31 जनवरी को दिल्ली और एनसीआर के सभी विभागों को आदेश दिया गया था कि भवन के आकार के आधार पर ही भू-जल दोहन की मंजूरी दी जाए। वहीं, एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में यह कहा था कि सभी भवन निर्माण के दौरान सीवेज शोधन परियोजना (एसटीपी) का पानी इस्तेमाल करें और भवन निर्माण के साथ ही एसटीपी लगाना अनिवार्य होगा। 

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