NGT ने दिया आदेश, सम-विषम फार्मूले की गुणवत्ता रिपोर्ट दें
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने टू-स्ट्रोक इंजन क्षमता वाले सभी दोपहिया वाहनों (सभी प्रकार के स्कूटर्स), तीन पहिया वाहनों और सीएनजी बसों से होने वाले उत्सर्जन की औचक जांच के निर्देश दिए हैं।
ग्रीन बेंच ने इसके लिए सड़क एवं परिवहन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) व दिल्ली सरकार को दो हफ्तों के भीतर जांच कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को याची के. मनोहरन की याचिका पर विचार के बाद सभी पक्षकारों को नोटिस भी दिया है।
सख्ती के साथ कार्रवाई और प्रतिबंध की मांग
याची ने टू-स्ट्रोक इंजन क्षमता वाले तीन पहिया वाहनों के साथ कुछ कंपनियों द्वारा लॉन्च की गई क्वाड्रिसाइकिल (ईंधन इस्तेमाल करने वाले हल्के चार पहिया वाहन) पर सख्ती के साथ कार्रवाई और प्रतिबंध की मांग की है।
याचिका के मुताबिक, टू-स्ट्रोक इंजन क्षमता वाले वाहनों में ईंधन के साथ लुब्रीकेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह ज्वलनशील होता है। इससे जबरदस्त तरीके से वायु प्रदूषण होता है।
याची ने मांग की है कि ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगना चाहिए। सुनवाई के दौरान एडवोकेट मेहता ने कहा कि 2 स्ट्रोक इंजन क्षमता वाली क्वाड्रिसाइकल से होने वाले उत्सर्जन को लेकर दिल्ली सरकार के पास किसी तरह की गाइडलाइन नहीं है।
वायु गुणवत्ता रिपोर्ट भी ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करें
एनजीटी ने सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से कहा है कि वह टू-स्ट्रोक इंजन क्षमता वाले वाहन निर्माताओं से भी इस संबंध में जवाब लेकर ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करे।
सुनवाई के दौरान मौखिक तौर पर जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि वह सम-विषम नियम लागू होने के दौरान दिल्ली के भीतर तैयार की गई वायु गुणवत्ता रिपोर्ट भी ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करें।
इससे पहले यूपी, बिहार के प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता रिपोर्ट मांगी गई थी।