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Delhi NCR News: एनजीटी ने अपशिष्ट टायर प्रबंधन मामले में अनुपालन आवेदन का किया निस्तारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 08:25 PM IST
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-पीठ ने कहा कि वर्ष 2022 में दिए गए आदेश का पालन संतोषजनक ढंग से किया गया
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने की प्रधान पीठ ने अपशिष्ट टायर प्रबंधन से जुड़े मामले में दायर अनुपालन आवेदन का निस्तारण कर दिया है। पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल थे। पीठ ने कहा कि 2022 में दिए गए आदेश का पालन संतोषजनक ढंग से हुआ है। यह मामला 2019 में दायर मूल आवेदन सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट बनाम भारत संघ व अन्य से जुड़ा है। 7 नवंबर 2022 को एनजीटी ने जीवन-समाप्त (एंड-ऑफ-लाइफ) टायरों और अपशिष्ट टायरों के पर्यावरणीय प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। खासतौर पर टायर पायरोलिसिस ऑयल (टीपीओ) बनाने वाली इकाइयों के संचालन पर सख्ती बरतने को कहा गया था।

एनजीटी ने अपने 7 नवंबर 2022 के आदेश में निर्देश दिया था कि नियमों का पालन न करने वाली टीपीओ इकाइयों को अनुपालन तक बंद किया जाए, इकाइयों का सही वर्गीकरण कर लागू मानकों को सख्ती से लागू किया जाए। इसके अलावा, संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को प्रभावी बनाया जाए। साथ ही, पायरोलिसिस ऑयल के ईंधन गुणवत्ता मानक तय करने, ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ और ‘जीरो एमिशन’ सुनिश्चित करने और प्रक्रिया से निकलने वाले कार्बन का उपयोग सीमेंट उद्योग में करने के निर्देश दिए गए थे। इस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अधिकरण को बताया कि संशोधित एसओपी सभी राज्यों को भेज दी गई है।
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टीपीओ इकाइयों को ऑरेंज श्रेणी में रखा गया है और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जनवरी 2026 तक देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 695 टीपीओ इकाइयां संचालित पाई गईं, जिनमें 440 इकाइयां नियमों का पालन कर रही हैं, जबकि 255 इकाइयां अप्रमाणित हैं। इनमें से 25 इकाइयां स्वयं बंद हो चुकी हैं। इसमें 33 को संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने बंद कराया है और 197 के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं, ईंधन गुणवत्ता मानक तय करने के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तिरुचिरापल्ली को एक शोध परियोजना सौंपी है। यह अध्ययन फरवरी 2025 में शुरू हुआ और नवंबर 2025 तक पूरा होना प्रस्तावित था। एनजीटी ने उम्मीद जताई है कि अध्ययन के आधार पर जल्द मानक तय किए जाएंगे।
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