श्रीश्री के कार्यक्रम पर अंतिम फैसला कल, जुर्माना जमा करने की प्रक्रिया शुरु
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श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में होने वाला कार्यक्रम कल से शुरु होगा या नहीं इस पर आज भी फैसला नहीं हो सका। अब इस पर अंतिम फैसला कल ही होगा।
आज हुई सुनवाई में एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी), पुलिस और अग्निशमन विभाग से इस कार्यक्रम को दिए गए अनुमति के बारे में पूछा।
तीनों ही विभागों ने एनजीटी को बताया कि कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण जारी है इस बारे में कल रिपोर्ट दे दी जाएगी। इस बीच एओएल के वकील ने कहा कि पांच करोड़ के जुर्माने को जमा कराने की प्रक्रिया जारी है।
बता दें कि एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में श्रीश्री रविशंकर ने कहा था कि वो जेल चले जाएंगे लेकिन जुर्माना नहीं भरेंगे। श्रीश्री का कहना था कि अगर किसी तरह की आपत्ति थी तो पहले बताना चाहिए था। हम कार्यक्रम करते ही नहीं।
उनका कहना था कि एनजीटी के इस आदेश को वो न्यायालय में चुनौती देंगे। बता दें कि बुधवार को सुनवाई के बाद एनजीटी ने फैसला देते हुए आर्ट ऑफ लिविंग को कार्यक्रम शुरु होने से पहले पांच करोड़ का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया था।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि उन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में ही जाना चाहिए जहां पहले से ही मामला विचाराधीन है।
शाम चार बजे प्रस्तुत होंगे सभी पक्ष
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को जानकारी देते हुए बताया है कि अभी तक जुर्माने की राशि जमा नहीं हुई है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने कहा है कि अगर आज शाम चार बजे तक राशि जमा नहीं होती तो सारी गतिविधियां रोक दी जाएंगी।
बता दें कि एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) पर पांच करोड़ जुर्माने के अलावा डीडीए पर पांच लाख और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) पर एक लाख का जुर्माना लगाया था। बेंच ने सभी पक्षों को शाम चार बजे प्रस्तुत होने का भी आदेश दिया है।
हालांकि आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) के प्रमुख श्री श्री रविशंकर ने कल ही ट्वीट कर कहा था कि एओएल एनजीटी के फैसले से संतुष्ट नहीं है और इसके खिलाफ अपील करेगा।
बेंच ने बुधवार को कहा याची मनोज मिश्रा ने 11 दिसंबर को दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखा और 8 फरवरी 2016 को ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी। इस समयावधि के बीच समारोह की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं।
इसलिए हम प्रतिबंध या संरचना को नष्ट करने संबंधी आदेश नहीं दे सकते। साथ ही याची ने 30 जून 2015 को डीडीए द्वारा दी गई मंजूरी को भी चुनौती नहीं दी है।
पर्यावरण के लिए एक आपदा है कार्यक्रम: हाईकोर्ट
उधर हाईकोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम पर बहुत सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पारिस्थितिक दृष्टि से एक आपदा है। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि पूरे क्षेत्र को समतल कर दिया गया है।
वहां लगी झाड़ियों और पेड़ों को हटा दिया गया है। ऐसे में वहां बाढ़ आ सकती है। आप (सरकार) ने बाढ़ के मैदान पर एक बड़ा पंडाल लगाने की अनुमति दे दी है।
इसके अलावा मयूर विहार एक और एक्सटेंशन स्टेशन पर स्पेशल काउंटर भी लगाए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को अधिक देर न रुकना पड़े। मयूर विहार फेस एक से होकर मेट्रो फीडर भी निकलती है, जो कि मयूर विहार तीन से शास्त्री पार्क के बीच सेवाएं देती है। यह फीडर मयूर विहार एक्सटेंशन, अक्षरधाम, लक्ष्मी नगर से होते हुए शास्त्री पार्क निकलती है।
आयोजक नोएडा से शटल चलाने की भी योजना बना रहे हैं, ताकि मेट्रो पर भार कम पड़े। हालांकि अभी कुछ तय नहीं हुआ है। इसके अलावा डीटीसी रूट के संबंध में भी पोस्टर लगाने जा रहे हैं।