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3 महीने पहले ही जान जाएंगे मौसम का हाल
सोमदत्त शर्मा/ अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 18 Feb 2014 07:58 AM IST
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अब जल्द ही बारिश और सूखे की सटीक जानकारी महीनों पहले मिलने लगेगी। साथ ही उत्तराखंड जैसी वर्षा महाप्रलय के बारे में भी महीनों पूर्व घोषणा की जा सकेगी।
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‘कपल मॉड्यूल’ और ‘सेवियर वेदर’ नाम से बनाई गई योजना पर देश के वैज्ञानिकों ने विदेशी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर कार्य करना शुरू कर दिया है।
पिछले समय में जहां मौसम विभाग बारिश, सूखे आदि को लेकर संभावना जाहिर करता था वहीं, अब सात दिन पहले मौसम की सटीक जानकारी देता है। लेकिन आने वाले समय में महीनों पहले इसकी सटीक घोषणा करना संभव होगा। इससे कृषि प्रधान देश के किसान बारिश के आधार पर फसल की बुआई कर सकेंगे।
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‘कपल माड्यूल’ और ‘सेवियर वेदर’ योजना को लेकर नेशनल सेंटर ऑफ मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) और नेशनल सेंटर फॉर इन्वायरन्मेंटल प्रेडिक्शन (एनसीइपी) में काम हो रहा है। इसके तहत एनसीएमआरडब्ल्यूएफ में स्थानीय वैज्ञानिकों के साथ यूके के वैज्ञानिक और एनसीइपी में देश के मौसम वैज्ञानिकों के साथ यूएसए के वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं।
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योजना के तहत ओसियन और एटमोसफेयर के डाटा को मर्ज कर विश्लेषण किया जा रहा है। जबकि अभी तक एटमोस्फेयर और ओसियन के डाटा का अलग-अलग अध्ययन किया जाता था। डाटा विश्लेषण के लिए 350 टेराफ्लोप का सुपर कंप्यूटर केंद्रों पर आ गया है जो कि जुलाई से कार्य करना शुरू करेगा।
एनसीएमआरडब्ल्यूएफ की निर्देशिका डॉ. स्वाति बसु ने बताया कि महीनों पहले मौसम की सटीक जानकारी करने को लेकर काम चल रहा है।
2017 तक हम 15 दिन से तीन महीने पहले तक मौसम की सटीक घोषणा करने में सक्षम होंगे। साथ ही सेवियर वेदर की सफलता के बाद उत्तराखंड जैसी आपदा, तूफान, भारी वर्षा जैसी घटनाओं की भी महीनों पूर्व सटीक भविष्यवाणी कर सकेंगे।
एनसीएमआरडब्ल्यूएफ के पहले निदेशक डॉ. रतन दत्ता ने बताया कि ओसियन से मिलने वाले डाटा को पहले अहम नहीं माना जाता था। लेकिन हाल ही में हुए शोध कार्यों से मालूम हुआ है कि ये मौसम की सटीक जानकारी के लिए अहम हैं, इसके बाद इनके विश्लेषण का कार्य शुरू हुआ है।