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2021 तक साइबर सिटी में दिखेंगे बदले हुए नजारे
प्रवीण कुमार/ अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 07 Feb 2014 10:26 AM IST
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साल 2021 तक साइबर सिटी की परिवहन व्यवस्था एकदम बदल जाएगी। यहां के निवासियों को आधुनिक परिवहन सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में तेजी से प्रयास इस बात के संकेत है कि आने वाले दिनों में यहां की उक्त व्यवस्था भी हाईटेक हो जाएगी।
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रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम से लेकर, उड़न खटोले, पौड़ टैक्सी का सफर लोगों को मुहैया होगा। दिनों-दिन बदलते शहर के परिवेश ने यहां नई व्यवस्थाओं की संभावनाओं को उजागर किया है।
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इन्हीं संभावनाओं के बीच यहां नए-नए प्रयोग करने की योजनाएं बनाई गई है। कुछ योजनाएं स्थानीय स्तर पर तो कुछ सरकारी स्तर पर बनाई गई है। सभी का फोकस आने वाले समय में होने वाली परेशानियों से पार पाने पर है।
सूबे के मुख्यमंत्री करीब एक साल पहले ही यहां पौड टैक्सी चलाने की बात कह चुके हैं। इस दिशा में साकारात्मक पहल शुरू कर दी गई है। इस बीव पिछले दिनों नगर निगम ने यहां उड़न खटोला की यात्रा की योजना बनाई है। इसके लिए बाकायदा आस्ट्रलियाई विशेषज्ञ शहर का दौरा भी कर चुके हैं।
इन दोनों योजनाओं को फलीफूत करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, उससे साफ है कि अगले एक-दो साल में ये सुविधाएं यहां उपलब्ध करा दी जाएंगी। सबसे बड़ी और मील का पत्थर मानी जा रही जो व्यवस्था यहां के नागरिकों को दी जाएगी वह रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम है यानी आरआरटीएस।
क्या है आरआरटीएस
यह दिल्ली और एनसीआर के दूसरे शहरों को जोड़ने वाला अपनी तरह का अनोखा ट्रांजिट सिस्टम है। यह रैपिड रेल का सबसे लंबा कॉरिडोर होगा जो एक साथ तीन राज्यों, दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान को कनेक्ट करेगा। कॉरिडोर की कुल लंबाई 180 किलोमीटर होगी। इसके लिए 19 स्टेशन बनाए जाएंगे। 32 किलोमीटर तक इसकी लाइन अंडरग्राउंड होगी तथा 141 किलोमीटर एलिवेटेड कॉरिडोर तथा 39 किलोमीटर का अंडग्राउंड कॉरिडोर बनाया जाएगा।
प्रोजेक्टर पर 24, 595 करोड़ का संभावित बजट बनाया गया है। इस पर दौड़ने वाली रैपिड ट्रेन की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इस लिहाज से दिल्ली से अलवर अब चार घंटे की बजाय महज 117 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। इसके निर्माण की समयावधि छह साल निर्धारित की गई है। वर्ष 2015 में इसका निर्माण शुरू किया जाना है। यानी 2021 में एनसीआर के लोगों को यह बड़ी और नई सौगात मिलेगी।
कॉरिडोर के प्रस्तावित स्टेशन
आईएसबीटी, कश्मीरी गेट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, सराय काले खां, निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, आईएनए, धौलाकुंआ, महिपालपुर, गुड़गांव साइबर सिटी, इफ्को चौक, खेड़की दौला, मानेसर, पचगांव, बिलासपुर, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, बावल, एसएनबी, खैरथल और अलवर।
एनसीआर के साथ दूर-दराज के शहरों से बढ़ेगी कनेक्टीविटी
आधुनिक परिवहन व्यवस्था मुहैया होने के बाद गुड़गांव की कनेक्टीविटी एनसीआर के शहरों के साथ ही नहीं बल्कि दूर दराज के इलाकों के साथ भी बेहतर होगी। आरआरटीएस जैसी व्यवस्था पानीपत और मेरठ के लिए बनाई गई है। यहां के लोग दिल्ल्ी कश्मीरी गेट पहुंच कर आसानी से मेरठ, पानीपत, और उनसे लगते शहरों में पहुंच सकेंगे। अलवर रूट के शहरों की दूरी भी इस सिस्टम से घट जाएगी।