राजनयिक रेप मामले के बाद दहशत में हैं नेपाली लोग
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राजनयिक रेप केस के बाद गुड़गांव में रह रहे नेपाली समुदाय के लोग काफी भयभीत हैं। उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। डीएलएफ फेज-2 के कैटरोइन सोसायटी में घटी घटना के बाद यहां रह रहे नेपाली अपनी बेटियों और पत्नियों को वापस अपने देश भेजने लगे हैं।
उनका कहना है कि वह यहां अकेले रह कर काम कर लेंगे, मगर जिस प्रकार का माहौल गुड़गांव-एनसीआर में बन रहा है, वह काफी खतरनाक है।
गुड़गांव में 10 हजार से अधिक नेपाली रहते हैं। इन सभी को अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। नेपालियों का कहना है कि गुड़गांव में बढ़ती आपराधिक घटनाएं पहले से ही परेशान कर रही हैं।
मगर जिस प्रकार से सऊदी राजनयिक ने नेपाली महिलाओं को बंधक बना रेप किया और उसे कोई सजा भी नहीं हुई यह चिंता का विषय है, ऐसे में उनकी सुरक्षा की यहां कोई गारंटी नहीं है।
बढ़ रहे अपराधों से चिंतित
गुड़गांव में नेपाली समाज के लोग सबसे अधिक होटलों और रेस्टोरेंट में काम करते हैं। मोमोज बेचने से लेकर स्कूलों, कॉलेजों और कंपनियों में चौकीदारी भी करते हैं।
नेपालियों का कहना है कि गुड़गांव में बढ़ते अपराध के कारण परिवार की सुरक्षा की चिंता काफी बढ़ गई है। काफी लोग ने अपनी युवा बहन, बेटियों और पत्नियों को वापस नेपाल भेज रहे हैं।
उनका कहना है कि खौफ में जीने से अच्छा है कि वह परिवार को अपने देश भेज दें। यही नहीं वह अपने परिचितों को गुड़गांव सहित दिल्ली-एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में आने से मना कर रहे हैं।
सिंकदरपुर, चक्कररपुर, वजीराबाद पटेल नगर, दिल्ली रोड और कापसहेड़ा बॉर्डर पर नेपाली समाज के लोग काफी संख्या में रहते हैं।
क्या कहते हैं नेपाली लोग
जैनस थापा ने कहा कि मैं एमजी रोड स्थित सहारा मॉल पर मोमोज की ठेली लगाता हूं। पिछले कई वर्षों से गुड़गांव में रहते हैं। यहां लगातार अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। पहले ऐसा नहीं था।
सऊदी राजनयिक घटना के बाद अपनी पत्नी को वापस नेपाल छोड़ आया हूं, क्योंकि मैं देर रात को कमरे पर वापस आता था। ऐसे में सुरक्षा की चिंता सता रही थी।
विष्णु थापा कहती है कि मेरे पति रेहड़ी लगाते हैं। जिस प्रकार से यहां महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहा है उससे तो घर से निकलने में भी काफी डर लगता है।
ऐसे महौल में रहने से अच्छा है कि अपने देश लौट जाऊं। सऊदी अरब वाले ने नेपाली महिला से दुष्कर्म किया और उसे कोई सजा भी नहीं मिली। ऐसी हालत में यहां न्याय मिलना भी संभव नहीं है।