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दो साल तक पेट में पट्टी लेकर घूमती रही महिला

Thu, 20 Aug 2015 12:52 PM IST
Updated Thu, 20 Aug 2015 12:52 PM IST
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negligence after the operation dumped strip in lady stomach

फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन और वहां की सीनियर गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका बधावन के खिलाफ महिला के पेट में गॉज (कॉटन की पट्टी) छोड़ने के मामले में दो साल बाद रिपोर्ट दर्ज की गई है।

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यह रिपोर्ट डीएम गौतमबुद्ध नगर द्वारा गठित बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर सेक्टर-58 थाने में दर्ज की गई। इन दो सालों में पीड़िता ने न्याय के लिए कई अधिकारियों के चक्कर काटे।

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पूरी तरह से स्वस्थ होने में उनके सात लाख से ज्यादा रुपये लग गए। वहीं, पीड़िता का मानना है कि अभी उन्हें पूरी तरह न्याय नहीं मिला है। पूरा न्याय तब होगा, जब दोषी अस्पताल प्रबंधन के लोग और डॉक्टर जेल जाएंगे।

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लापरवाही से पेट में छोड़ दी थी पट्टी

negligence after the operation dumped strip in lady stomach

मूल रूप से अलीगढ़ निवासी अमूल भार्गव दिल्ली स्थित एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं। फिलहाल वह फरीदाबाद स्थित चार्मवुड विलेज में रह रहे हैं। 23 दिसंबर 2013 को उन्होंने पत्नी नम्रता (30) को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के लिए भर्ती कराया।

डिलीवरी फोर्टिस अस्पताल की सीनियर सीजेरियन डॉ. मोनिका बधावन और उनकी टीम के नेतृत्व में हुई। डॉक्टर की लापरवाही से ऑपरेशन के दौरान नम्रता के पेट में गॉज (कॉटन की पट्टी) छूट गया।

मोनिका को फिट बताते हुए कुछ दिन बाद  अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। छह माह बाद पट्टी की वजह से नम्रता के पेट में दर्द रहने लगा। जब नम्रता ने दर्द के बारे में डॉ. मोनिका और अस्पताल प्रबंधन को बताया तो उन्होंने इसे नकार दिया।

दूसरे अस्पताल पहुंची तो पता चला पेट में गाज है

negligence after the operation dumped strip in lady stomach

इसके बाद अमूल ने मोनिका का इलाज दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में कराया, जहां अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पता चला कि नम्रता के पेट में गॉज है। इस मामले की शिकायत जब अमूल ने फोर्टिस प्रबंधन से की तो अस्पताल ने इस आरोप से इंकार कर दिया और उन्हें वापस लौटा दिया।

बाद में अमूल ने नम्रता का ऑपरेशन दिल्ली के एक अस्पताल में कराया, जहां से गॉज को निकाला गया। अमूल ने मामले की शिकायत एसएसपी से की, जिस पर एसएसपी ने पूरा मामला डीएम के भेज दिया।

डीएम ने जांच के लिए एडिशनल सीएमओ, सिटी मजिस्ट्रेट और डीएसपी का एक बोर्ड गठित किया। इस बोर्ड ने डीएम को 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट दे दी। इसमें फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन, डॉ. मोनिका बधावन और उनकी टीम को नम्रता के पेट में गॉज छोड़ने के लिए दोषी ठहराया गया।

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