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'क्राइम की कोई कटऑफ डेट नहीं हो सकती'

Tue, 15 Jul 2014 12:57 PM IST
Updated Tue, 15 Jul 2014 12:57 PM IST
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Need stricter Juvenile Justice Act: Supreme Court

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य मामलों के आरोपियों को वयस्कों जैसी सजा दिए जाने का प्रस्ताव रखने के बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने किशोर अधिनियम को और सख्त बनाने के संकेत दिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक आदेश में कहा कि अपराध की कोई कटऑफ डेट नहीं हो सकती है। अपराध कोई सरकारी नौकरियां नहीं है कि इसमें कटऑफ डेट जारी की जाए।
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गौरतलब है कि मोदी सरकार पहले ही नाबालिगों के लिए बने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव की तैयारी कर चुकी है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने हाल ही में ऐसे संकेत दिये थे।

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...तो निर्भया कांड में आ जाएगा नया मोड़

Need stricter Juvenile Justice Act: Supreme Court

दरअसल, नाबालिगों के लिए बने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव की तैयारी निर्भया कांड को ध्यान में रखकर की जा रही है। दिल्ली के वसंत विहार में 16 दिसंबर, 2012 को चलती बस में एक मेडिकल इंटर्न छात्रा से बर्बरता से गैंगरेप हुआ, जिससे उसकी मौत हो गई।

मामले में कोर्ट ने चार आरोपियों को कड़ी की सजा सुनाई, लेकिन एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसे महज तीन साल की सजा मिली। जब आरोपी को तीन साल की सजा हुई थी तब भी मामला काफी उछला था। लेकिन यूपीए सरकार ने एक्ट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया था।

अब एनडीए सरकार इसमें बदलाव के लिए प्रयासरत है। अगर होता होता है तो निर्भया गैंगरेप कांड में एक नया मोड़ आ जाएगा।

अपराध की एक जैसी हो सजाः मेनका गंधी

Need stricter Juvenile Justice Act: Supreme Court

मेनका गांधी ने हाल ही में साजिश के तहत की गई हत्या और बलात्कार के मामलों में किशोर आरोपियों को वयस्कों की तरह सजा दिए जाने का प्रस्ताव रखा था।

उन्होंने पुलिस रिकॉर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कहा था कि करीब 50 फीसदी यौन अपराध 16 साल से कम उम्र के किशोर अंजाम देते हैं। इसके बावजूद उन्हें कोई कड़ी सजा नहीं दी जाती।

उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि किशोर जानते हैं कि अपराध के एवज में उन्हें कोई सख्त सजा नहीं मिलेगी। इसलिए वो अपनी उम्र का नाजायज फायदा उठाते हैं।

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