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एनबीसीसी दे सकता है देनदारों को ज्यादा जमीन का नया प्रस्ताव

Mon, 02 Dec 2019 04:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Dec 2019 04:22 AM IST
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NBCC can give new proposal of more land to debtors
nbcc - फोटो : PTI

दिवालिया हो चुकी रियल्टी फर्म जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत सरकारी एजेंसी राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) लि. देनदारों को और जमीन देकर 20 हजार फ्लैट पूरे करने की समय सीमा को घटाने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार निगम देनदारों को यह अतिरिक्त जगह उन गैर-आवंटित फ्लैट और जमीन के टुकड़ों के जरिये दे सकता है जो मुकदमों के अधीन हैं।

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घर खरीदने वालों के लिए निगम का प्रयास है कि अधूरे फ्लैट पूरे करने की समय सीमा प्रस्तावित चार साल से घटे। यह समय सीमा 17 नवंबर को प्रस्तावित की गई थी। 28 नवंबर को लेनदारों की समिति के साथ हुई बैठक में समिति ने मांग की थी कि निगम और सुरक्षा रियल्टी तीन दिसंबर तक अपनी आखिरी बोली सौंपे। 
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इसके लिए उन्हें पूर्व में की गई बोली को संशोधित करने और इसे घर खरीदने वालों व बैंकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने को कहा गया था। निगम से बिना मालिकाना विवाद की अतिरिक्त जमीन भी मांगी गई थी। निगम ने इससे पहले लेनदारों को मुकदमों में फंसी 600 एकड़ जगह व फ्लैट देने प्रस्ताव किया था। लेनदार चाहते हैं कि उन्हें यमुना एक्सप्रेस-वे पर जमीन मुहैया करवाई जाए। 
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बैंकों के 9800 करोड़ बकाये के समाधान के लिए निगम ने 5 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 1426 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव पिछले महीने रखा था। माना जा रहा है कि आगरा-नोएडा को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर जमीन देनदारों को दी जा सकती है। इसके बदले में निगम ने 2500 करोड़ रुपये और उधारी की भी मांग रखी है, जिससे अधूरे फ्लैट पूरे किए जा सकें।

नए प्रस्तावों की तैयारी
सूत्रों के अनुसार निगम अपनी अंतिम बोली में पिछली बार प्रस्तावित जमीन व फ्लैट का विकल्प वापस ले सकता है। 1426 एकड़ भूमि के अलावा कुछ और जगहें भी देने का प्रस्ताव कर सकता है। मुंबई की सुरक्षा रियल्टी ने 25 करोड़ रुपये देने के अपने प्रस्ताव से आगे बढ़कर अब 7857 करोड़ रुपये मूल्य की 1,934 एकड़ जमीन देनदारों को प्रदान करने का प्रस्ताव तैयार किया है। साथ ही अगले तीन वर्ष में अधूरे निर्माण पूरे करने के लिए दो हजार करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल देने को भी वह राजी है।

अब तक यह हुआ
संकट से जूझ रहे जय प्रकाश एसोसिएट्स की सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक अगस्त 2017 में दिवालिया होने की प्रक्रिया में डाली गई। इसके लिए कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने आईडीबीआई के नेतृत्व में बने बैंकों के समूहों को आवेदन पत्र दिया। कंपनी के काम और दिवालिया प्रक्रिया पूरी करने के अंतरिम समझौता तय करने के लिए अनुज जैन को नियुक्त किया गया। 

पहले चरण के बाद सुरक्षा ग्रुप की कंपनी लक्षदीप ने 7350 करोड़ की बोली लगाई थी, लेकिन लेनदारों ने इसे नकार दिया। इसी वर्ष मई में निगम व सुरक्षा रियल्टी द्वारा लगाई गई बोली भी लेनदारों की समिति ने नकार दी थी। मामला कंपनी लॉ के अपीलीय अभिकरण में गया, जहां से इसे सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया। 


छह नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि जेपी इंफ्राटेक की दिवालिया प्रक्रिया 90 दिन में पूरी की जाए। नए प्रस्ताव केवल निगम और सुरक्षा रियल्टी की ओर से आमंत्रित किए जाएं। इस पूरे विवाद में 13 बैंक और 23 हजार घर खरीदार फंसे हैं, जिन्हें लेनदारों की समिति में मताधिकार दिया गया है। घरों के खरीदार करीब 60 प्रतिशत वोट रखते हैं। किसी भी बोली को स्वीकार करने के लिए 66 प्रतिशत वोट मिलना जरूरी है। घरों के खरीदार दावा करते हैं कि कुल 13 हजार करोड़ रुपया फंसा है। 

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