मिसाल: धर्म का बंधन तोड़कर दान की किडनी
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लोकसभा चुनाव में जहां सांप्रदायिकता को हवा देकर वोट की राजनीति हो रही है, वहीं कानपुर की नाजिया और गोरखपुर की विमला ने सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण पेश किया है।
ब्लड ग्रुप मिलने पर विमला ने नाजिया के पति को और नाजिया ने विमला के पति को किडनी दान कर उनकी जान बचाई।
दिल्ली के एक निजी अस्पताल में पिछले दिनों किडनी प्रत्यारोपण कराने के लिए कानपुर के मोहम्मद शमीम और गोरखपुर के रमेश द्विवेदी भर्ती हुए थे।
नहीं मैच कर रहा था ब्लड ग्रुप
दोनों की पत्नी अपने-अपने पति को किडनी दान करना चाहती थीं, लेकिन उनका ब्लड ग्रुप पति से नहीं मेल खा रहा था। परिवार और करीबी रिश्तेदारों में भी कोई किडनी दान करने वाला नहीं था।
इलाज कर रहे चिकित्सकों को पता चला कि शमीम की पत्नी का ब्लड ग्रुप रमेश से और विमला का ब्लड ग्रुप शमीम से मेल खा रहा है। इसके बाद दोनों के परिजनों से चिकित्सकों ने बातचीत की।
दोनों एक-दूसरे के पति को किडनी देने के लिए राजी हो गईं। नौ अप्रैल को सफलतापूर्वक ऑपरेशन करके किडनी प्रत्यारोपण कर दिया गया। चारो अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।