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एनसीआर की कंपनियों में बढ़ रही है नक्सलियों की घुसपैठ
मलिक असगर हाशमी/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 21 May 2014 07:52 AM IST
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गुड़गांव सहित हरियाणा और एनसीआर के कई जिले माओवादियों की शरणस्थली बनते जा रहे हैं। नोएडा में तीन दिन पूर्व नक्सली कमांडर कृष्ण कुमार उर्फ अजय उर्फ अभय की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है।
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वैसे भी समय-समय पर नक्सली विचारों वाले पोस्टर चस्पा कर वे अपनी मौजूदगी का एहसास कराते रहते हैं। इस बार कुछ परेशान करने वाली जानकारियां पुलिस के हाथ लगी हैं।
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नोएडा में पकड़ा गया कमांडर लैंडमाइन ब्लास्ट में घायल होने के बाद न सिर्फ गुड़गांव में अपना इलाज करा चुका है, बल्कि एक कंपनी में कुछ दिनों तक काम भी करता रहा। इससे नक्सलियों की कंपनियों में घुसपैठ का पता चलता है। यहां बिना किसी पैरवी के उसे नौकरी नहीं मिली होगी।
बता दें कि तकरीबन साल भर पहले गुड़गांव के मानेसर स्थित मारुति सुजुकी प्लांट में हुई भयानक हिंसा में कंपनी के एक अधिकारी जिंदा जला दिए गए । घटना के बाद इसको लेकर सूबे के कई हिस्सों में बवाल काटा गया।
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जिसके बाद पिछले वर्ष 22 अगस्त को तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में जो बयान दिया, उससे भी श्रमिकों के बीच नक्सलियों की बढ़ती पैठ का खुलासा होता है। उन्होंने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया था कि मारुति के श्रमिक आंदोलन के पीछे माओवादियों का हाथ है।
इसे वे अपने फ्रंट आर्गेनाइजेशन के माध्यम से हवा दे रहे हैं। उस दौरान मारुति में उत्पात मचाने के अधिकांश आरोपी हरियाणा के उन जिलों (जैसे हिसार, रोहतक, पानीपत आदि) से गिरफ्तार किए गए, जिसके बारे में आईबी की समझ है कि नक्सली यहां अपने पैर जमा चुके हैं। हालांकि, उस समय प्रदेश के मुख्य सचिव ने आंदोलन में नक्सली-श्रमिक गठजोड़ से इनकार किया।
हरियाणा सहित इन प्रदेशों में सक्रिय
आईबी रिर्पोट में कहा गया है कि नक्सलियों के 128 फ्रंट आर्गेनाजेशन यानी खुला संगठन देशभर में सक्रिय है। इनमें 17 झारखंड में, 13 आंध्र प्रदेश, 12 कर्नाटक, 10 बिहार, 10 ओडिशा, 9 दिल्ली, 9 महाराष्ट्र, 9 पंजाब, 8 हरियाणा, 6 छत्तीसगढ़, 4-4 केरल, तमिलनाडू और 3 गुजरात में छदम नाम से सक्रिय हैं।
शक की सुई
मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में हिंसा के बाद पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदेशभर में शुरू हुए आंदोलन को हवा देने में मेहनतकश मजदूर मोर्चा, डोमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठन सक्रिय थे। इनके बारे में केंद्रीय खुफिया एजेंसी को नक्सलियों के खुला संगठन होने का अंदेशा है।