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छह दशक से पुरानी दिल्ली की पहचान है नवश्री धार्मिक रामलीला

Thu, 26 Sep 2019 03:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 26 Sep 2019 03:40 AM IST
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Navshree religious Ramlila is the identity of Old Delhi since six decades
तैयारियां... - फोटो : अमर उजाला

करीब छह दशक से नवश्री धार्मिक रामलीला पुरानी दिल्ली की पहचान है। करीब 61 वर्ष पहले चांदनी चौक के गांधी मैदान से शुरू होने वाली इस रामलीला का मंचन अब लालकिला ग्राउंड पर होती है। 

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शुरुआत में इस रामलीला में घूमने वाले मंच का प्रयोग किया जाता था, जिसे आज भी पुरानी दिल्ली के किस्सों में गिना भी जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद तक इस रामलीला के मंच पर आ चुके हैं। गांधी मैदान पर पार्किंग बनने के कारण 90 के दशक में यह रामलीला लालकिला ग्राउंड पर आ गई। 
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करीब 40 वर्षों तक इस रामलीला में यूपी के मुरादाबाद के कलाकार मंचन किया करते थे। लेकिन अब बीते कुछ वर्षों से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कलाकार किरदार निभाते हैं। पंडित अमितोष के नेतृत्व में रामलीला का मंचन किया जाता है। 
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नवश्री धार्मिक रामलीला के प्रेस सचिव राहुल शर्मा बताते हैं कि शुरुआत में उनकी कमेटी के अध्यक्ष चांदनी चौक के व्यापारी लाला प्रहलाद राय, महामंत्री बाबू गणपत राय, मंत्री प्रेमचंद गुप्ता और लीला मंत्री उमराव सिंह हुआ करते थे। इनके जमाने में घूमने वाले मंच के साथ- साथ परशुराम संवाद भी काफी लोकप्रिय था।

इस बार नवश्री धार्मिक रामलीला में आगामी 29 सिंतबर से लोगों को अत्याधुनिक मंचन मिलेगा। साथ ही प्रभु श्रीराम जन्म के अलावा रावण के जन्म से जुड़ी लीला भी देखने को मिलेगी। ऐसा पहली बार है जब दिल्ली की रामलीला में रावण जन्म की लीला का मंचन होगा। 

दिल्ली में सबसे पहले श्री धार्मिक रामलीला का मंचन वर्ष 1923 में चांदनी चौक से हुआ था। करीब 35 वर्षों तक यहां हर वर्ष रामलीला का मंचन देखने के लिए दिल्ली के कोने कोने से लोग पहुंचते थे, लेकिन आयोजकों के बीच मतभेद होने के कारण वर्ष 1958 से इस रामलीला का विभाजन हो गया। एक नाम हुआ श्री धार्मिक लीला कमेटी और दूसरा नवश्री धार्मिक रामलीला कमेटी। 


अत्याधुनिक तकनीकों के अलावा 3डी स्क्रीन का मिलेगा आनंद
दर्शकों को रामलीला में अत्याधुनिक तकनीकों के जरिये लीला देखने को मिलेगी। इसके अलावा प्रभु श्रीराम का वर्षों पुराना वह रथ भी दिखेगा, जो सिर्फ नवश्री धार्मिक रामलीला कमेटी के पास है। यह रथ करीब 100 वर्ष पुराना है और इसका वजन कई टन है। चार घोड़ों के जरिये रथ चलाया जाता है।  

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