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केंद्रीय मंत्री बोलीं, उन्हें नहीं पता कैसे लगी फोटो
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 12 Mar 2015 08:17 AM IST
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देश के पहले शिक्षा मंत्री पर प्रकाशित एक पुस्तक में मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ नजमा हेपतुल्ला की एक तस्वीर के कथित मोरफिंग मामले में नया मोड़ आ गया है। नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि उनको नहीं पता कि उनकी फोटो किस प्रकार लगाई गई है।
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गौरतलब है कि सीबीआई पहले ही हेपतुल्ला को क्लीन चिट प्रदान कर चुकी है। सीबीआई ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। न्यायमूर्ति राजीव शक्कधर के समक्ष सुनवाई के दौरान हेपतुल्ला की और से पेश अधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है कि हेपतुल्ला ने फोटो लगवाईं। इसके अलावा जैसे ही यह मामला प्रकाश में आया किताब के वितरण से पूर्व ही फोटो को हटा दिया गया था।
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अदालत ने मामले की सुनवाई 23 अप्रैल तय की है।
अदालत आजाद के पोते फिरोज बख्त अहमद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने आरोप लगाया है कि हेपतुल्ला को मई 1958 को स्नातक की उपाधि प्राप्त हुई थी जबकि आजाद का 22 फरवरी 1958 को निधन हो गया था। ऐसे में उक्त फोटो कैसे खींची जा सकती है।
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